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देखिए, कैसे हिमालय की कोख से निकाला जाता है ये कीमती शहद

नेपाल में गुरूंग जनजाति के लोग कई पीढ़ी से इस काम से जुड़े हैं।

देखिए, कैसे हिमालय की कोख से निकाला जाता है ये कीमती शहद
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कासकी। नेपाली क्षेत्र वाले हिमालय के आदिवासी समुदाय के लोग अपनी जान जोखिम में डालकर हर रोज हिमालय के पेट से निकालते हैं, बेहद कीमती शहद। ये शहद दवाओं में प्रयोग की जाती है जिसे ये नेपाली शिकारी जापान, कोरिया और चीन को बेच देते हैं। इन आदिवासियों के लिए एकमात्र यही रोजगार का साधन है। इस काम को ये जनजाति पिछले कई सालों से करती आ रही है।
हालाकि इन शहद के शिकारियों के इस रोजगार पर सरकार की नजर पड़ गई है, जिसके चलते सरकार इस व्यापार को अपने हाथ में लेना चाहती है। इससे इनकी जीविका पर खतरा मंडराने लगा है। नेपाल में गुरूंग जनजाति के लोग कई पीढ़ी से इस काम से जुड़े हैं।
आदिवासी हनी का शिकार करने के लिए धूएं, रस्सी और सीढ़ी का प्रयोग करते हैं। सबसे पहले आग लगाकर बहुत सारा धूआं किया जाता है। हनी शिकारी एक रस्सी के सहारे हिमालय की गहराईयों में उतरते हैं। अपना संतुलन बनाए रखने के लिए वो अपने पास एक बांस का डंडा भी रखते हैं।
सबसे पहले धूएं से ये मधुमक्खियों को बेहोश कर देते हैं और फिर ये उन छत्तों को तोड़कर अपनी टोकरी में गिरा लेते हैं। इस प्रकार ये अपनी जान जोखिम में डालकर रोज हनी का शिकार करते हैं।
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नीचे की स्लाइड्स में देखिए, कैसे शिकार को अंजाम देते हैं ये हनी शिकारी-

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