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10 खौफनाक सजा! कैदियों को ऐसे उतारा जाता था मौत के घाट, पढ़कर कांप जाएगी रूह

पहले इन तरीकों से कैंदियों को सजाएं दी जाती थी जैसे चूहों से कटवाना, सूली चढ़ाना, लकड़ी के बुल में आदमी को फसाकर भुनना कई तरीके अपनाएं जाते थे।

10 खौफनाक सजा! कैदियों को ऐसे उतारा जाता था मौत के घाट, पढ़कर कांप जाएगी रूह
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आम तौर पर ये सभी जानते है कि प्राचीन काल में राजा अपनी प्रजा में अपना खोफ बनाने के लिए दोषियों और लोगों को बर्बरता से सजा दिया करते थे। जिनमें से अब भी उन सजाओं को अपनाया जा रहा है।

दुनिया में पहले कैदियों अपराधीयों को ऐसे खौफनाक सजा दी जाती थी जिसे जानकर हर किसी की रूह कांप जाये जैसे खौलते तेल में डालना, चूहों से कटवाना और आदमी के दो टुकड़े कर देना आदि।

जानिए 10 खौफनाक सजाओं को बारे में...

1-सूली पर चढ़ाना

लकड़ी के क्रॉस का साइंन बनाकर लोगों को खुले में सभी के सामने सजा दी जाती थी। लोगों को एक लकड़ी के क्रॉस में बांधा जाता था फिर उन्हें लोगों के बीच खुले में छोड़कर पीड़ादायक मौत दी जाती थी। इसे मध्य युग में एक तौर से बहुत ही प्रसिद्ध अभ्यास माना जाता था।
जैसा कि क्रूस पर चढ़ने की कहानी सुनते ही भगवान यीशु मसीह से स्पष्ट हो जाता है कि उन्होंने बुराई के खिलाफ आवाज उठाई और उन्हें सभी के सामने सुली पर चढ़ा दिया गया। इसके लिए उन्हें शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक प्रताड़ना भी दी गई।

2-मारने के लिए चूहो का इस्तेमाल करना

कारागार में बंद केदियों को पहले के लोग चूहों का उपयोग कर लोगों को यातनाएं देकर मारा करते थे। ये तरीका अभी भी अपनाया जाता है जिसको काफी पसंद किया जाता है। लेकिन शुरुआती समय में यह बहुत अधिक था। चूहे के जाल में एक चीज थी, जहां एक पिंजरे के अंदर आदमी का धड़ डाला जाता था।
दूसरी तरफ को गर्म किया जाता था जिससे चुहे दूसरी तरफ भागना शुरू कर देते थे। जहां अपराधी का धड़ के साथ शरीर होता था। चूहा अपना रास्ता बनाने किए पीड़ित के मांस को धीरे-धीरे खाना शुरू कर देते थे।

3-लकड़ी के बुल के नीचे आग पर भुनना

प्राचीन यूनानियों ने इस विधि को शुरू किया था। जिसे सिसिली बुल भी कहा जाता था। क्योंकि यह सिसिली में आविष्कार किया गया था। यह एक वास्तविक बैल के आकार का होता था। जो कांस्य से बने एक उपकरण का होता था।
जिसे निंदा करने वाले व्यक्ति को अंदर-बंद कर दिया जाता था। फिर आग को बैल के नीचे सेट किया जाता था। जब तक उस व्यक्ति को मृत्यु के लिए भुनाया नहीं गया।

4 जीवित आदमी के शरीर से चमड़ी उखाड़ना

फ्लेयिंग का शाब्दिक अर्थ है स्किनिंग, ये केवल मरे हुए जानवरों के शरीर से मांस को निकाला जाता था लेकिन इससे इंसानों को भी अक्सर सज़ा दी जाती थी। इसके शुरूआती दौर में ज़िंदा आदमीयों त्वचा को निकाला जाता था।
ये सजा उन्हें दी जाती थी जो मानसिक या शारीरिक रूप से घायल व अपंग अपना जीवन जी रहे थे। मेसोपोटामिया में यातना बहुत प्रसिद्ध थी। इसी तरह लोगों को अपने शरीर से निकाले गए मांस से दंडित किया गया।

5-पहिएं से बांध कर सजा देना।

शास्त्रीय मोड में ब्रेकिंग व्हील का उपयोग किया जाता था। जिसमें दोषी को बंधकर रखा जाता था। कभी-कभी स्पाइक्स से भी। जो कारावास में रहते थे उन्हें पहिया के मोड़ के साथ बांधकर कुंडल के साथ पीटा जाता था।
उसके शरीर की हड्डियां धीरे-धीरे टूट जाती थी। जिसके कारण एक तीव्र दर्दनाक मौत दी जाती थी।

आगे की स्लाइड्स में जानिए अन्य 5 खौफनाक सजाओं को बारे में...

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