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सीताराम व्यास का लेख : राष्ट्र निर्माण की नींव मजबूत करेगी

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति प्राचीन, सनातन व आधुनिक भारतीय ज्ञान और विज्ञान की समृद्ध परम्परा के आलोक में तैयार की गई है। यह 21 वीं शताब्दी की पहली शिक्षा नीति है जिसका लक्ष्य हमारे देश के विकास के लिये अनिवार्य आवश्यताओं को पूरा करना है। यह नीति नूतन तथा चिरपुरातन मूल्यों का समन्वित रूप है। यह इस सदी के युवाओं के लिए है जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत को विश्व में अग्रिम पंक्ति में लाकर खड़ा करेगी। नई नीति भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में मददगार साबित होगी। इस नीति में विद्यार्थियों के समग्र विकास पर ध्यान दिया गया है।

हिमाचल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तत्काल प्रभाव से लागू , अब प्रदेश में शिक्षा के स्तर में सुधार की उम्मीद
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प्रतीकात्मक तस्वीर

सीताराम व्यास

राष्ट्रीय शिक्षा नीति देश में सर्वत्र संवाद का विषय बनता जा रहा है। शिक्षा क्षेत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर गोष्ठियां भी हो चुकी हैं। इसका व्यापक रूप में स्वागत हुआ है। यह प्रथम बार सरकार की परिधि से निकलकर सारे देश की शिक्षा नीति बन गयी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि शिक्षा नीति 21 वीं सदी के भारत को नई दिशा देगी। उन्होंने कहा कि विदेश नीति, रक्षा नीति की तरह शिक्षा-नीति भी राष्ट्र की होती है। 37 वर्ष के पश्चात यह शिक्षा नीति बनी। इन 37 वर्षों में भारत और विश्व के परिदृश्य में व्यापक परिर्वतन आया है। नई शिक्षा नीति में संस्कृति, जीवन मूल्य एवं युगानूकूल समाज-रचना का त्रिवेणी- संगम है। शिक्षा नीति के पृष्ठ 4 में उल्लेख है 'प्राचीन और सनातन भारतीय ज्ञान और विज्ञान की समृद्ध परम्परा के आलोक में यह नीति तैयार की गयी है।

यह नीति 21 वीं शताब्दी की पहली शिक्षा नीति है जिसका लक्ष्य हमारे देश के विकास के लिये अनिवार्य आवश्यताओं को पूरा करना है।' उपर्युक्त सन्दर्भ स्पष्ट करता है कि हमारी शिक्षा-नीति नूतन तथा चिरपुरातन मूल्यों का समन्वित रूप है। यह शिक्षा नीति 21 वीं सदी के युवाओं के लिए है जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत को विश्व में प्रथम स्थान पर लाकर खड़ा करेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 'मेरे सपनों का भारत' को मूर्त रूप देगी और भविष्य का भारत पुन: ज्ञान विज्ञान का केन्द्र बनकर विश्व का मार्ग दर्शन करेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति पृष्ठ 6 के अंतिम अवतरण में भारत के युवाओं के लिये महत्त्वाकांक्षी योजना का उल्लेख है 'भारत के युवाओं को भारत देश के बारे में और इसकी विविध सामाजिक, सांस्कृतिक और तकनीकी आवश्यकताओं सहित यहां की अद्वितीय कला भाषा और ज्ञान परम्पराओं के बारे में ज्ञानवान बनाना राष्ट्रीय गौरव आत्मविश्वास, आत्मज्ञान, परस्पर सहयोग, एकता की दृष्टि से और भारत के सतत ऊंचाइयों की ओर बढ़ने की दृष्टि से अति आवश्यक है।'

राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रारूप प्रसिद्ध इसरों के वैज्ञानिक डा. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में तैैयार किया गया। पिछली शिक्षानीति का मूल विषय शिक्षा से ही संबधित रहा है। उस समय देश में अशिक्षित लोग अधिक थे। इसलिये 1968 की शिक्षानीति का लक्ष्य था कि 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को अनिवार्य शिक्षा दी जाए। देखा जाए तो यह मुद्दा समयानुकूल ही था। दूसरी शिक्षानीति 1986 में लागू की गयी। इसका उद्देश्य समाज के विभिन्न समूहों के बीच विषमता को समाप्त करना था। अब 2020 में आई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का महत्त्वपूर्ण उदात्त लक्ष्य समाज के विभिन्न वर्गों के मध्य संतुलित समन्वय करके समतायुक्त जीवन-शैली को खड़ा करना है। जैसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति पृष्ठ 15 में वर्णन हैं 'सामाजिक आर्थिक रूप से वंचित समूहों पर विशेष जोर देते हुए सभी छात्रों की सीखने में मदद करने के लिये स्कूली शिक्षा के दायरे को व्यापक बनाने का प्रस्ताव है, जिससे औपचारिक, अनौपचारिक शिक्षा के अन्दर सीखने के विभिन्न रास्ते उपलब्ध हो सकें। इस शिक्षा नीति ने वंचित समाज के बालकों को शिक्षित करने की व्यवस्था भी दी है जो बालक नियमित रूप से विद्यालय में अध्ययन नहीं कर सकते, उनके लिये नेशनल इन्सटीट्यूट ऑफ ओपन लर्निग स्कूलिंग (एनआईओएस) और राज्यों के ओपन स्कूलों द्वारा ओपन एन्ड डिस्टेन्स लर्निंग (ओएडीएल) कार्यक्रमों का विस्तार कराने की व्यवस्था दी है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति की प्रथम विशेषता ज्ञान के साथ-साथ कौशल-विकास को जोड़ना है। पहले ज्ञान और कौशल-विकास को अलग करके देखा जाता था। दूसरी विशेषता शिक्षा का माध्यम त्रिभाषा फार्मूला जरूर है लेकिन वह अभी जारी फार्मूला से अलग हैै। इसमें किसी भाषा की अपरिहार्यता और अनिवार्यता जरूरी नहीं। ग्रेड 5 तक, संभव हो तो ग्रेड 8 तक तथा उससे आगे भी शिक्षा का माध्यम मातृभाषा/ स्थानीय भाषा/ क्षेत्रीय भाषा होगी। पाठ्य पुस्तक भी मातृभाषा में उपलब्ध करायी जायेगी। इसमें स्थानीय भाषा को शिक्षा का माध्यम बनाने का प्रयास स्तुत्य है। अंग्रेजी भाषा शिक्षा का माध्यम बनती जा रही है, कई राज्यों ने अंग्रेजी माध्यम की स्कूल खोलने की घोषणा कर दी है। यह चिंता का विषय है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति की समिति ने शिक्षा को सर्वस्पर्शी बनाया है। ईसीसीई में दिव्यांग बच्चों को शामिल करने की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उनको प्रारम्भिक स्तर से उच्चस्तर तक की शिक्षण-प्रक्रिया में सम्मिलित होने के लिए सक्षम बनाया जाएगा।

1990 के पश्चात विश्व का परिदृश्य तेजी से परिवर्तित हुआ। वैश्वीकरण और उदारीकरण की बयार तेजी से बहने लगी। इस शिक्षा-नीति ने विश्व संदर्भ में भारतीय अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं को दृष्टि में रखा है। आज भारत तीसरी आर्थिक महाशक्ति की श्रेणी में आ गया है। भारत कोविड -19 के कारण आर्थिक दृष्टि से चीन को परास्त कर दूसरी महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर हैं। इस शिक्षा नीति में भारत को आर्थिक दृष्टि सबल बनाकर विश्व में उत्कर्ष पर प्रतिष्ठित करने की व्यापक योजना है। ज्ञान के परिदृश्य में विश्व तेजी से परिवर्तन की ओर जा रहा है। बिग डेटा, मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेस के क्षेत्रों में वैज्ञानिक और तकनीकी विकास तेजी से हो रहा है। डेटा साइंस, कम्प्यूटर साइंस और गणित क्षेत्र में कुशल कामगारों की जरूरत है। नई एनईपी ने नये विचार, नवीन ज्ञान और विज्ञान जनित संम्भावनाओं को एकत्रित करके ऐसे शिक्षार्थियों की निर्माण की दिशा में बल दिया जो विश्व में, कार्यकुशलता और नवीनीकृत ज्ञान के समन्वित बल पर, अपना स्थान निर्मित कर सकें। नई नीति कौशल-विकास और प्रशिक्षण के द्वारा आर्थिक उपार्जन पर भी विशेष ध्यान केंद्रित करती है।

एनईपी ने समाज के अंतिम व्यक्ति को सक्षम बनाते हुए राष्ट्रीय विकास को बढ़ावा देने का संकल्प किया है। शिक्षा की पहंुच सार्वभौमिक सुनिश्चित की है। इस नीति का लक्ष्य रहेगा कि प्रत्येक बालक का स्कूल में नामांकन हो और वह नियमित विद्यालय आए। एनएसएसओ के मुताबिक 2017-18 में 6 -7 वर्ष की उम्र के 3.22 करोड़ बालक विद्यालय नहीं जाते थे। वर्तमान शिक्षा नीति का 2030 तक लक्ष्य रहेगा कि शत-प्रतिशत छात्र विद्यालय में पढ़ने जाएं। 'समता मूलक और समावेशी शिक्षा सभी को उपलब्ध रहेगी' जन जातीय समाज, अनूसूचित जनजाति को शिक्षित करने का शिक्षा नीति में विशेष प्रावधान है। वर्तमान नीति छात्रों में ऊर्जा, आत्मविश्वास, आत्मगौरव, जिजीविषा जगायेगी। शिक्षकों-छात्रों में निहित हीन भावना मिटाकर आत्मविश्वास का संचार करेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में लाकर खड़ा करने वाली होगी। यह नीति लोक कल्याणकारी, लोक मंगलकारी है। इस नीति में समग्रता, आत्मज्ञान तथा राष्ट्रीय गौरव का अनूठा समावेश है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं )

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