बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 1 घंटा 37 मिनट का भाषण केवल सरकार की उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहा। इस संबोधन में प्रधानमंत्री का लहजा पहले से अधिक तीखा, भावनात्मक और आक्रोश से भरा दिखाई दिया।

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और विशेष रूप से गांधी परिवार पर सीधे प्रहार किए। नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी और राहुल गांधी तक का उल्लेख करते हुए उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों को देश की बदहाली का जिम्मेदार ठहराया। उनके भाषण में गुस्सा, पीड़ा, कटाक्ष और राजनीतिक आक्रामकता- सब एक साथ नजर आए।

हालांकि प्रधानमंत्री ने 2014 के बाद हुए बदलावों, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति और व्यापारिक समझौतों को बड़ी उपलब्धि बताया, लेकिन विपक्ष के कई तात्कालिक सवालों पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

सवाल यह है-

  • क्या प्रधानमंत्री का यह भाषण तथ्यों पर आधारित जवाब था या विपक्षी दबाव का राजनीतिक प्रतिउत्तर?
  • क्या विपक्ष जिन मुद्दों पर चर्चा चाहता था, उन्हें प्रधानमंत्री ने स्पर्श किया?

इन्हीं सवालों पर हरिभूमि और INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी के साथ विशेष "चर्चा" में राजनीति और पत्रकारिता से जुड़े दिग्गजों ने खुलकर अपनी राय रखी।

इस खास पेशकश में शामिल हुए-

  • डॉ. ममता त्यागी- प्रवक्ता, बीजेपी
  • डॉ. हिलाल अहमद- प्रवक्ता, कांग्रेस
  • सोफिया खान- नेता, टीएमसी
  • राजकुमार सिंह- वरिष्ठ पत्रकार

प्रधानमंत्री मोदी के भाषण पर किसने क्या कहा? जानने के लिए देखें पूरी चर्चा।

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