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उत्तराखंड: कई सड़क परियोजनाएं ठप

राजमार्गो के लिए भूमि अधिग्रहण के मामले में मुआवजे की राशि तय करने में भी एचएचएआई की कोई भूमिका नहीं है और केवल वह राशि जमा करने और भुगतान करने तक ही समित है।

उत्तराखंड: कई सड़क परियोजनाएं ठप
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केंद्र सरकार की सड़क परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के मुद्दे पर घिरे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने साफ किया है कि इस मामले में एनएचएआई की कोई भूमिका नहीं है। ऐसे विवादों के कारण फिलहाल उत्तराखंड में कई परियोजनाएं पूरी तरह से बंद हैं।

दरअसल उत्तराखंड में नगीना-काशीपुर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के लिए काशीपुर में भूमि अधिग्रहण के मामले में अनियमितताओं की जांच सीबीआई द्वारा की जा रही है।

जांच के कारण यह सड़क परियोजना लंबित पड़ी हुई है। ऐसे ही इस राज्य में कई परियोजनाएं लटकी हुई हैं, जिन्हें लेकर एनएचएआई की भूमिका पर भी सवाल खड़े किये जा रहे हैं।

इसलिए एनएचएआई ने सफाई देते हुए कहा कि यह मामला राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में राजस्व अधिकारियों द्वारा जमींदारी उन्मूलन अधिनियम की धारा 143 के तहत भूमि उपयोग में कथित परिवर्तन से संबंधित है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार में है।

इसलिए एनएचएआई के अधिकारियों की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में किसी प्रकार की कोई भूमिका नहीं है। एनएचएआई का कहना है कि उत्तराखंड में चार धाम परियोजना यानि केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री भी भारतमाला परियोजना के तहत भी पटरी पर उतारी जा चुकी है, लेकिन इस मामले का उस पर कोई असर नहीं है।

मुआवजा देने तक सीमित

एनएचएआई के मुख्य महाप्रबंधक विष्णु दरबारी ने इस संबन्ध में कहा कि एनएचएआई ने इस मामले में कभी भी एजेंसी द्वारा किसी भी जांच या जांच के लिए कोई आपत्ति नहीं जताई है, क्योंकि एनएचएआई ने राज्य सरकार के अधिकारियों और भूमि अधिग्रहण मामलों में एनएचएआई के अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारियां स्पष्ट हैं।

राजमार्गो के लिए भूमि अधिग्रहण के मामले में मुआवजे की राशि तय करने में भी एचएचएआई की कोई भूमिका नहीं है और केवल वह राशि जमा करने और भुगतान करने तक ही समित है।

दरबारी का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के लिए मुआवजा राशि संबन्धित राज्यों के राजस्व अधिकारियों और विवाद की स्थिति में न्यायालयों द्वारा तय की जाती है।

एनएचएआई ने यह भी आशंका जताई है कि यदि ऐसे मामले विवादों में रहे और उनका समय से निपटना नहीं किया गया तो तो इसका असर अन्य राज्यों में चल रही परियोजनाओं पर भी पड़ सकता है, जिसके कारण देश में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजनाओं के प्रभावित होने से इंकार नहीं किया जा सकता।

क्या है भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया

एनएचएआई के सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए भूमि का अधिग्रहण राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम-1956 के प्रावधानों के तहत हासिल की जाती है।

इसके लिए संबन्धित राज्य सरकार की सिफारिश के के तहत राज्य के राजस्व अधिकारी एनएच अधिनियम की धारा 3ए के तहत सक्षम प्राधिकारी की विधिवत नियुिक्त करते हैं। प्रारंभिक अधिसूचना के बाद अंतिम अधिसूचना के साथ ही अवार्ड की घोषणा भी अधिनियम के तहत सक्षम प्राधिकरण के डोमेन के दायरे में होता है।

परियोजनाएं पूरी करना चुनौती

प्राधिकरण के मुख्य महाप्रबंधक दरबारी का कहना है कि एनएचएआई के सामने सड़क परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना एक बड़ी चुनौती है और खासकर सड़क परियोजनाओं में एक प्रमुख मील का पत्थर माने जाने वाली भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में अड़चने ऐसी परियोजनाओं पर विपरीत प्रभाव ड़ालती हैं।

इसके लिए राज्य सरकारों और उनके राजस्व अधिकारियों की सकारात्मक भूमिका को जवाबदेही बनाने की जरूरत है, क्योंकि राज्य के राजस्व अधिकारी ही राजस्व रिकार्ड के संरक्षक माने जाते हैं।

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