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गणतंत्र दिवस 2018: उत्तराखंड में सेना का शौर्य-संस्कृति की झलक

उत्तराखंड में आज ​69वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया और मुख्य समारोह यहां परेड ग्राउंड में हुआ जहां राज्यपाल डॉक्टर कृष्ण कांत पाल ने तिरंगा फहराया।

गणतंत्र दिवस 2018: उत्तराखंड में सेना का शौर्य-संस्कृति की झलक

उत्तराखंड में आज ​69वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया और मुख्य समारोह यहां परेड ग्राउंड में हुआ जहां राज्यपाल डॉक्टर कृष्ण कांत पाल ने तिरंगा फहराया। राज्यपाल ने राष्ट्रीय ध्वज को नमन करते हुए परेड की सलामी ली। सेना, आई.टी.बी.पी., एस.एस.बी., होमगार्ड, पी.आर.डी के जवानों सहित एन.सी.सी ने मार्च पास्ट करते हुए राज्यपाल को सलामी दी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत तथा उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के अलावा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। इस अवसर पर राज्य के लोक कलाकारों ने भी अपनी नृत्य कला का मनोहरी प्रदर्शन किया। समारोह में पुलिस बैण्ड की देश भक्ति से संबंधित गीतों की जोशीली धुनों के मध्य राज्यपाल द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कर्तव्यपरायण पुलिस कर्मियों को भी सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर राज्यपाल ने गणतंत्र दिवस की बधाई देते हुए कहा कि आज ही के दिन वर्ष 1950 में हमारा गौरवशाली संविधान अस्तित्व में आया था जिसमें हमें मौलिक अधिकार देने के साथ ही हमारे कर्तव्य भी निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम केवल अधिकारों की बात न करके अपनी क्षमताओं और योग्यताओं के अनुसार राष्ट्रनिर्माण और समाज की उन्नति के लिए अपने कर्तव्यों का गंभीरता से निर्वहन करें।

मुख्यमंत्री रावत ने भी समारोह के दौरान वयोवृद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से भेंट कर उनकी कुशल क्षेम जानी तथा शॉल भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। इस बार कार्यक्रम स्थल पर हेलीकॉप्टर द्वारा पुष्प वर्षा भी की गई। एक अन्य कार्यक्रम में, मुख्यमंत्री रावत ने अपने आवास पर ध्वजारोहण किया तथा संविधान निर्माताओं एवं स्वतन्त्रता संग्राम सैनानियों को श्रद्धांजली अर्पित की।

उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं पर 24 घन्टे तैनात हमारे जवानों के कारण हम चैन की साँस ले पा रहे हैं और गणतन्त्र दिवस की खुशी उनके बीच रहकर बाँटनी चाहिए और इसलिये वे आईटीबीपी जवानों को गणतंत्र दिवस की बधाई देने तथा इस पर्व को उनके मध्य जाकर मनाने के लिये वह निलांग व मातली जा रहे हैं।

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