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उत्तराखंड : पिछले 4 साल में बढ़ा प्रदेश का लिंगानुपात, कुछ जिले काफी आगे तो कुछ स्थिर

इस साल जून में स्वास्थ्य मंत्रालय के हेल्थ मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम ने जन्म लिंगानुपात की रिपोर्ट जारी की थी। 2015 में जहां जन्म लिंगानुपात की दर प्रति एक हजार पर 906 थी। वहीं अब यह संख्या प्रति हजार लड़को पर 938 लड़कियों तक पहुंच गई है।

उत्तराखंड : पिछले 4 साल में बढ़ा प्रदेश का लिंगानुपात, कुछ जिले काफी आगे तो कुछ स्थिरUttarakhand Include In Top 5 State For Birth Sex Ratio

उत्तराखंड इन दिनों उत्तरकाशी की एक घटना को लेकर चर्चा में है। जहां 133 गांवों में पिछले 3 महीने से बेटी का ही जन्म नहीं हुआ। इसके साथ वहां अब लिंगानुपात को लेकर एक नई बहस ने जन्म ले लिया है।

गौरतलब है कि उत्तराखंड लिंगानुपात के मामले में देश के शीर्ष पांच राज्यों में अपनी जगह बनाए हुए हैं। लेकिन प्रदेश के चमोली, चंपावत, पिथौरागढ़ जिले में 2015 से लेकर अब तक कोई भी सुधार देखने को नहीं मिला है।

इस साल जून में स्वास्थ्य मंत्रालय के हेल्थ मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम ने जन्म लिंगानुपात की रिपोर्ट जारी की थी। 2015 में जहां जन्म लिंगानुपात की दर प्रति एक हजार पर 906 थी। वहीं अब यह संख्या प्रति हजार लड़को पर 938 लड़कियों तक पहुंच गई है।

इसके बढ़ने के पीछे प्रदेश सरकार की कुछ नीतियां भी रही। साथ ही विभाग ने संस्थागत डिलीवरी को बढ़ावा देने के साथ जन्म-मृत्यु पंजीकरण, अल्ट्रासाउड सेंटरों की जांच आदि कई और बिंदुओं को फोकस किया।

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