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पूर्व मुख्यमंत्रियों पर मेहरबान सरकार, लाखों का बकाए माफ करने के लिए लाएगी अध्यादेश

2002 में विधानसभा चुनाव के हुआ और एनडी तिवारी मुख्यमंत्री बने। हर मुख्यमंत्रियों की तरह उन्हें भी सरकारी आवास मिला। जब वह पद से हटे तो उनका 1 करोड़ 13 लाख रुपया बकाया था। जिसे उन्होंने नहीं चुकाया। बीसी खण्डूरी के नाम 46.59 लाख रुपए, वर्तमान केंद्रीय मंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक पर 40.95 लाख व विजय बहुगुणा पर 37.50 लाख रुपए बकाया हैं।

पूर्व मुख्यमंत्रियों पर मेहरबान सरकार, लाखों का बकाए माफ करने के लिए लाएगी अध्यादेश

उत्तराखंड सरकार (Uttarakhand Government) ने अपने प्रदेश के पुराने मुख्यमंत्रियों के सरकारी बंगले की बकाया राशि को माफ करने के लिए एक अध्यादेश लाने जा रही है। इस अध्यादेश के बाद मुख्यमंत्रियों द्वारा भारी भरकम रकम को माफ कर दिया जाएगा। इस अध्यादेश को लाने के पीछे नैनीताल हाईकोर्ट का वो फैसला है जिसमें कहा गया था कि पूर्व मुख्यमंत्रियों की बकाया राशि वसूली जाए।

9 नवंबर सन 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड राज्य बना। एक साल के लिए नित्यानंद स्वामी और उसके बाद भगत सिंह कोश्यारी प्रदेश के सीएम बने। इस दौरान विधानसभा के चुनाव नहीं हुए थे। 2002 में विधानसभा चुनाव के हुआ और एनडी तिवारी मुख्यमंत्री बने। हर मुख्यमंत्रियों की तरह उन्हें भी सरकारी आवास मिला। जब वह पद से हटे तो उनका 1 करोड़ 13 लाख रुपया बकाया था। जिसे उन्होंने नहीं चुकाया।

दिंवगत एनडी तिवारी (ND Tiwari) के बाद बकाएदारों की लिस्ट में भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Kaushari) का नाम आता है जिनके नाम 47.57 लाख रुपए बकाया है। बीसी खण्डूरी के नाम 46.59 लाख रुपए, वर्तमान केंद्रीय मंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक (Ramesh Pokhriyal Nishank) पर 40.95 लाख व विजय बहुगुणा (Vijay Bahuguna) पर 37.50 लाख रुपए बकाया हैं। ये सारे बकाए बाजार दर के अनुसार निर्धारित किया गया। यही कारण है कि पूर्व मुख्यमंत्री राज्य संपत्ति विभाग को ये पैसा नहीं दे पा रहे हैं।


नैनीताल हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से बाजार भाव में ही किराया वसूलने का आदेश दिया था। राज्य संपत्ति और बाजार भाव में करीब 4 गुने का अंतर है। इस फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और भगत सिंह कोश्यारी राहत की मांग लेकर कोर्ट की शरण में चले गए। कोर्ट ने इनकी बातों को सुना और फैसला सुरक्षित रख लिया। आने वाले कुछ दिनों में फैसला सुनाया जा सकता है।

हाईकोर्ट के फैसलों के इतर प्रदेश के सीएम त्रिवेद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्रियों को राहत देने के लिए अध्यादेश की तैयारी शुरू कर दी है। अपनों पर मेहरबानी के लिए मशहूर त्रिवेंद्र सरकार पहले से ही मशहूर है। हालही में उन्होंने राज्य के दायित्वधारियों के भत्ते और मानदेय में करीब 3 गुना बढ़ोत्तरी कर दी है। और अब पूर्व मुख्यमंत्रियों क राहत देने के लिए अध्यादेश लाया जा रहा है।

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