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Kanwar Yatra 2019 : कांवड़ यात्रा 2019 में कांवड़ियों को नहीं मिलेगा मसूरी में प्रवेश, ये है वजह

Kanwar Yatra 2019 : उत्तराखंड की पुलिस ने फैसला लिया है कि कांवड़ियों को मसूरी में नहीं आने दिया जाएगा। इसके लिए बकायदा सीसीटीवी कैमरे का प्रयोग होगा। रोकने का जितना प्रयास किया जा सकता है उतना किया जाएगा। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि पुलिस प्रशासन पिछले कई सालों से उन्हें रोकने की कोशिश करता है पर हर बार वह मसूरी में आने में सफल हो जाते हैं।

Kanwar Yatra 2019 कांवड़ यात्रा 2019 : कांवड़ियों को नहीं मिलेगा मसूरी में प्रवेशKanwar Yatra 2019 kanwadiya banned Mussoorie

Kanwar Yatra 2019 : 17 जुलाई 2019 से सावन का महिना शुरू हो जायेगा। देश के तमाम शिवालयों में बोलबम और हर हर मदादेश के जयकारे गूंजने लगेंगे। देश के तमाम हिस्सों के शिवभक्त कांवड़िए गंगा, यमुना समेत पवित्र नदियों का जल लेकर देवघरों की तरफ जाते दिखाई देंगे। कई प्रदेशों की सरकारे उनके लिए रास्ता क्लीयर करवाया जाएगा। इसी बीच उत्तराखंड ने कांवड़ियों को निराश करने वाला फैसला लिया है।

उत्तराखंड की पुलिस ने फैसला लिया है कि कांवड़ियों को मसूरी में नहीं आने दिया जाएगा। इसके लिए बकायदा सीसीटीवी कैमरे का प्रयोग होगा। रोकने का जितना प्रयास किया जा सकता है उतना किया जाएगा। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि पुलिस प्रशासन पिछले कई सालों से उन्हें रोकने की कोशिश करता है पर हर बार वह मसूरी में आने में सफल हो जाते हैं। इसबार भी प्रशासन की तैयारी पहले जैसे ही है।

गौरतलब है कि प्रदेश का कांवड़ मेला पूरे देश में प्रसिद्ध है देश के तमाम हिस्सों से शिवभक्त यहां पहुंचते रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक इस बार कांवड़ियों की संख्या तीन करोड़ को पार कर सकती है। इतनी बड़ी भीड़ को सम्भालना सरकार व पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती होगी। खासकर हरियाणा, बिहार और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कांवड़ियों के बारे में कहा जाता है कि ये नियम तोड़ने में सबसे आगे होते हैं। पुलिस से भी कई बार भिड़ते देखा गया है।


मसूरी में कांवड़ियों के प्रवेश को रोके जाने का प्रमुख कारण है उनके द्वारा वहां उत्पाद मचाया जाना। स्थानीय लोग बताते हैं कि मन में भक्ति लिए कांवड़ यात्रा पर जा रहे लोगों का व्यवहार भगवा धारण करते ही उग्र हो जाता है और वह कहीं भी उपद्रव कर देते हैं। मसूरी होटल एसोसिएशन ने भी पुलिस के फैसलों पर सहमति जताई है होटल मालिकों का भी अनुभव यही है कि कांवड़िए बेवजह का बवाल करते हैं जिससे धार्मिक उन्माद फैलने का डर रहता है।

कांवड़ियों को लेकर बना डर पिछले कुछ सालों से लोगों के दिमाग में बैठ गया है। इसी लिए प्रशासन को ऐसा फैसला लेना पड़ता है। देहरादून के एसएसपी ने कहा कि शहर में कांवड़ियों को रोकने के लिए पांच गेट बनाए गए हैं। भगवाधारी वस्त्र पहने किसी भी इंसान को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। लेकिन अगर वह कपड़ा बदल लेता है तो उसे जाने की अनुमति होगी।

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