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Coronavirus Lockdown: कोरोना वायरस ने छीन ली रोजी-रोटी, अपना दर्द बताते हुए रो पड़ा ये शख्स

Coronavirus Lockdown: कोरोना वायरस से जो लोग संक्रमित हैं, वो तो दर्द में हैं ही। उनके साथ-साथ देश की आबादी के आधे से ज्यादा लोग दर्द में हैं जिनकी रोजी-रोटी ही कोरोना ने छीन ली है।

Coronavirus Lockdown: कोरोना वायरस ने छीन ली रोजी-रोटी, अपना दर्द बताते हुए रो पड़ा ये शख्सCoronavirus Lockdown: कोरोना वायरस ने छीन ली रोजी-रोटी, अपना दर्द बताते हुए रो पड़ा ये शख्स

Coronavirus Lockdown: कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों से ज्यादा कष्ट तो उन लोगों की जिंदगी में आ गया, जिनकी रोजी-रोटी ही छिन गई। वे लोग पैदल ही अपने घरों को निकल पड़े। उन्हें किसी वायरस का कोई खौफ नहीं था।

उन्हें चिंता थी तो बस परिवार के सदस्यों की। उनकी नजरों में पत्नी, बच्चे और माता-पिता के भूख से बड़ा खौफ दूसरा कोई नहीं हो सकता था। इसी क्रम में ओमकार नाम का एक मजदूर 300 किमी पैदल चल कर टनकपुर पहुंचा। जब उससे बात की गई तो उसके दर्द भरे शब्दों से सबकी आंखें नम हो गई।

एक महीने पहले गया था धारचूला

ओमकार ने कहा कि अपने और अपने परिवार के भूख को मिटाने के लिए वो अपने पांच साथियों के साथ धारचूला गया था। वहां उन्हें भवन निर्माण में मजदूरी का काम मिला। लेकिन कोरोना ने उनसे उनकी रोजी-रोटी का जरिया ही छीन लिया। काम बंद हो गया और फिर वो पैदल ही अपने घर के लिए निकल गए।

रास्तें में कुछ गाड़ियों के ड्राइवर ने कई मिन्नतों के बाद उन्हें कुछ दूरी तक के लिए लिफ्ट दिया। लेकिन ज्यादातर पैदल ही उन्हें सफर करना पड़ा। रास्ते में खाना तक उन्हें नसीब नहीं हुआ। उन्हें नमकीन और बिस्कुट खाकर अपनी भूख मिटानी पड़ी। लेकिन जब वो टनकपुर पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें वहीं रोक लिया। उसे दौलतपुर बहराइच जाना है। क्योंकि घर में उसका परिवार उसके लिए परेशान हो रहा है।

ऐसे लाखों मजदूरों की जिंदगी में भर गया है दर्द

ये कहानी सिर्फ एक मजदूर ओमकार की नहीं है। ये कहानी उन लाखों गरीब परिवारों की है जिनकी जिंदगी कोरोना वायरस ने रोक दी है। वो लोग रोज कमाकर खाते थे। आज न उनके पास अपने लिए खाना है और न अपने परिवार के लिए। उन्हें कोरोना का कोई खौफ नहीं है।

उन्हें खौफ है कि आज शाम में मेरा बच्चा भूखा सोएगा। उन्हें खौफ है कि कल उनके परिवार को खाना नसीब होगा या नहीं। सरकार उनके लिए कई इंतजाम कर रही है। लेकिन क्या वो काफी है? उनका ये दर्द कोई नहीं समझ सकता।

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