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इस मंदिर में नामी गिरामी डकैत भी टेकते थे माथा

यह मंदिर पांच सौ साल से भी अधिक प्राचीन है जहां लोगों की मुरादें पूरी होती हैं। इसीलिये हर रोज दूरदराज से इस मंदिर में माथा टेकने आते हैं।

इस मंदिर में नामी गिरामी डकैत भी टेकते थे माथा
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उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के सरीला तहसील क्षेत्र के भेड़ी डांडा गांव में बेतवा नदी किनारे ऊंचाई में स्थित सैकड़ों साल पुराने मां महेश्वरी मंदिर अपनी चमत्कारी शक्तियों के लिये आज भी पूरे बुन्देलखण्ड क्षेत्र में प्रसिद्ध है।

इस मंदिर में दस्यु सम्राट मलखान सिंह, माधोसिंह, मोहर सिंह, बाबा मुस्तकीन, फूलन देवी, रमेश सिकरवार सहित बीहड़ों के आतंक कहलाने वाले डकैतों ने ने घंटा चढ़ाकर मां से आशीर्वाद लिया था।
यह मंदिर पांच सौ साल से भी अधिक प्राचीन है जहां लोगों की मुरादें पूरी होती हैं। इसीलिये हर रोज दूरदराज से इस मंदिर में माथा टेकने आते हैं। उनका दावा है कि नि:संतान लोगों की भी इस मां के मंदिर से मुरादें पूरी हुई हैं।
यह मंदिर जमीन से 61 फीट ऊंचा है। मंदिर के अंदर मां महेश्वरी की मूर्ति, दीवाल में बनी गहरी अलमारी में स्थापित है। बगल में एक कुंड बना है जिसकी गहराई का अंदाजा कोई भी नहीं लगा सका। इस कुंड में जल हमेशा भरा रहता है। साथ ही कुंड में भरे जल के सेवन करने से व्यक्ति बीमारी से भी निजात पा जाता है।
पुजारी बाबा ने बताया कि मंदिर के पास गांव में महीनों तक फूलन देवी ने ली थी पनाह गांव के कुछ लोगों ने बताया कि फरारी के समय पुलिस से बचने के लिये डाकू फूलन देवी ने भी इस मंदिर के पास ही अपनी बिरादरी के एक घर पर महीनों तक पनाह ली थी।
आम महिलाओं की तरह साड़ी पहनकर वह खेतों में भी काम करती थी। उन्हें कोई भी नहीं जान पाया था। चार एकड़ जमीन में बीचों-बीच मां महेश्वरी का मंदिर किसी जमाने में काफी जर्जर हो गया था तब क्षेत्र के लोगों ने इसे संवारने के लिये बैठक कर एक समिति गठित की। इस समिति ने मंदिर का कायाकल्प कराया।
मंदिर को भव्य स्वरूप देने के लिये महाराष्ट्र के कारीगरों को बुलाया गया था जो सालों तक गांव में डेरा डालकर मंदिर को भव्यता देने में लगे रहे।

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