Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

ब्राह्मण चेहरों में पार्टी प्रदेश अध्यक्ष खोजने की माथापच्ची, इन नेताओं को सौंपी जा सकती है कमान

लोकसभा चुनाव 2019 में प्रचंड जीत दर्ज करने के बाद भाजपा हर स्तर पर अपने आपको मजबूत बनाए रखना चाहती है। उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष को चुनाव में शानदार जीत का इनाम मिला है और उन्हें केंद्रीय मंत्रीमंडल में शामिल किया गया है। उनके जाने के बाद नए अध्यक्ष को लेकर नए-नए नामों पर चर्चा शुरू हो गई है।

ब्राह्मण चेहरों में पार्टी प्रदेश अध्यक्ष खोजने की माथापच्ची, इन नेताओं को सौंपी जा सकती है कमान

लोकसभा चुनाव 2019 में प्रचंड जीत दर्ज करने के बाद भाजपा हर स्तर पर अपने आपको मजबूत बनाए रखना चाहती है। उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष को चुनाव में शानदार जीत का इनाम मिला है और उन्हें केंद्रीय मंत्रीमंडल में शामिल किया गया है। उनके जाने के बाद नए अध्यक्ष को लेकर नए-नए नामों पर चर्चा शुरू हो गई है।

भाजपा प्रदेश में पार्टी की बागडोर ऐसे हाथों को सौंपना चाहती है जो लगातार विस्तार कर सके। पार्टी दोबारा किसी ब्राम्हण चेहरे की तलाश में है। इस लिस्ट में कई नाम लगातार सामने आ रहे हैं जिनमें महेश शर्मा आगे दिखाई दे रहे हैं।

प्रदेश की राजनीति में भाजपा जातीय फैक्टर में एकदम पीछे नहीं रहना चाहती। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां ठाकुर समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं तो उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ओबीसी वर्ग को साधने के लिए हैं। अभी तक प्रदेश के अध्यक्ष महेंद्रनाथ पाण्डेय ब्राम्हणों के चेहरे के रूप में प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

पूर्व केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा के साथ स्वतंत्रदेव सिंह भी अध्यक्ष दौड़ में आगे हैं। स्वतंत्रदेव को भाजपा ने मध्यप्रदेश का चुनाव प्रभारी बनाया जहां उन्होंने विपक्षी पार्टी कांग्रेस को चारो खाने चित्त कर दिया। वहीं मनोज सिन्हा के नाम की भी सुगबुगाहट चल रही है।

गाजीपुर से चुनाव हारने के बाद भाजपा उन्हें पार्टी की कोई जिम्मेदारी देने के मूड में है। सिन्हा का व्यक्तित्व एक कामकाजी और मिलनसार नेता के रूप में रहा है। वह भी अध्यक्ष की रेस में किसी से पीछे नहीं हैं। वैसे भी पार्टी में ब्राम्हण नेताओं की कमी है। जो दिनेश शर्मा और महेश शर्मा जैसे बड़े नाम तो हैं पर एक ब्राम्हण नेता के रूप में अपनी स्वीकार्यता नहीं बना पाए हैं।

Loading...
Share it
Top