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लोकसभा चुनाव 2019: महान हाकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद की बेटी भी मोदी को देंगी टक्कर

काशी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोकसभा चुनाव में टक्कर देने वालों में महान हाकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद की बेटी हीना का भी नाम जुड़ गया है जिन्होंने महिलाओं के मसलों पर आवाज बुलंद करने के लिये आखिरी दिन पर्चा भरा । हीना को बखूबी पता है कि यहां मुकाबला उनके और मोदी के बीच नहीं है लेकिन उन्हें हार का खौफ नहीं है ।

लोकसभा चुनाव 2019: महान हाकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद की बेटी भी मोदी को देंगी टक्कर
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काशी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोकसभा चुनाव में टक्कर देने वालों में महान हाकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद की बेटी हीना का भी नाम जुड़ गया है जिन्होंने महिलाओं के मसलों पर आवाज बुलंद करने के लिये आखिरी दिन पर्चा भरा । हीना को बखूबी पता है कि यहां मुकाबला उनके और मोदी के बीच नहीं है लेकिन उन्हें हार का खौफ नहीं है ।

उन्होंने कहा कि, यह सोचकर बैठ तो नहीं जायेंगे ना कि मोदीजी को हराना नामुमकिन है। मुझे हार का खौफ नहीं है और राजनीति में मुझे लंबी पारी खेलनी है। मुझे पता है कि यहां बहुत से लोग मुझे जानते भी नहीं होंगे लेकिन मैं उनसे एक मौका जरूर मांगूंगी। वाराणसी लोकसभा सीट से हीना ने जनहित पार्टी के टिकट पर आखिरी दिन अपना पर्चा भरा।

मोदी के खिलाफ कांग्रेस ने अजय राय को प्रत्याशी बनाया है। सपा बसपा गठबंकाशी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोकसभा चुनाव में टक्कर देने वालों में महान हाकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद की बेटी हीना का भी नाम जुड़ गया है जिन्होंने महिलाओं के मसलों पर आवाज बुलंद करने के लिये आखिरी दिन पर्चा भरा । हीना को बखूबी पता है कि यहां मुकाबला उनके और मोदी के बीच नहीं है लेकिन उन्हें हार का खौफ नहीं है ।न के प्रत्याशी तेजबहादुर का नामांकन खारिज कर दिया गया है। पेशे से फैशन डिजाइनर हीना की पहचान ओलंपियन मोहम्मद शाहिद की बेटी के रूप में है और हाकी में जब ड्रिबलिंग का नाम आता है तो सबसे ऊपर शाहिद का नाम लिया जाता है।

मास्को ओलंपिक (1980) में स्वर्ण और एशियाई खेलों (1982 में रजत और 1986 में कांस्य) में पदक जीत चुके शाहिद उस दौर में हाकी के महानायक थे जब खेल से जुड़ाव रेडियो के जरिये ही होता था और रेडियो शाहिद, शाहिद, शाहिद' के उद्घोष से गूंजता रहता था। शाहिद का बनारस प्रेम किसी से छिपा नहीं था और उन्होंने 2016 में अंतिम सांस भी यहीं ली।

यह पूछने पर कि क्या पिता को उनका दर्जा नहीं मिल पाने का मलाल उन्हें राजनीति में खींच लाया है, हीना ने वाराणसी से भाषा से कहा, मैं निजी मसलों को लेकर राजनीति में नहीं आई। पापा के गुजरने के बाद कई दलों ने मां को राजनीति में आने के लिये कहा लेकिन हम इसके लिये तैयार नहीं थे। मैं महिलाओं के मसलों पर आवाज उठाने के लिये चुनाव लड़ रही हूं।

हीना का मानना है कि मोदी ने पिछले पांच साल में वाराणसी में बहुत काम किया है लेकिन उन्हें गुरेज जाति के आधार पर हो रही राजनीति से है। उन्होंने कहा, लगभग सभी राजनीतिक दल जाति के नाम पर युवाओं को बांट रहे हैं। देखकर मन दुखता है। इसका विरोध जरूरी है और उसके लिये आगे आना होगा। वाराणसी में 19 मई को मतदान होगा। पिछली बार मोदी ने यहां 5,81,023 वोट हासिल करके पहली बार लोकसभा चुनाव जीता था। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल को 2,09,238 और अजय राय को 75,614 वोट मिले थे।

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