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कासगंज हिंसा: कई मुसलमानों की जलाईं दुकानें, बेरोजगार हुए सैकड़ों हिंदू कर्मचारी

26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर तिरंगा यात्रा को लेकर भड़की हिंसा ने उस समय भयानक रूप ले लिया था, जब चंदन नाम के एक शख्स की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

कासगंज हिंसा: कई मुसलमानों की जलाईं दुकानें, बेरोजगार हुए सैकड़ों हिंदू कर्मचारी
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कासगंज में हुई सांप्रदायिक हिंसा में कई मुसलमानों की दुकानें जला दी गईं, जिसके कारण यहां काम करने वाले उनके हिंदू कर्मचारी बेरोजगार हो गए। यहां दुकान में काम करने वाले वीर बहादुर ने कई बार अपने मालिक सरदार अली खान को फोन कर कहा कि उसे पैसों की जरूरत है। अली की इस हिंसा में दुकान जला दी गई थी।

गौरतलब है कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर तिरंगा यात्रा को लेकर भड़की हिंसा ने उस समय भयानक रूप ले लिया था, जब चंदन नाम के एक शख्स की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

इसके बाद 27 जनवरी को घंटाघर चौक पर मुस्लिम समुदाय के लोगों की दुकानें जला दी गई थी और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था। इन से कई मुस्लिमों की दुकानों पर हिंदू समुदाय के लोग काम करते थे।

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कर्मचारी वीर बहादुर के मुताबिक, मुस्लिम समुदाय की 5 दुकानों में करीब 20 हिंदू कर्मचारी थे, जो कि दुकानें जलने के बाद से ही बेरोजगार हो गए हैं और वे काफी निराश भी हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुकाबिक, बातचीत करते हुए वीर बहादुर ने बताया कि मैं पिछले 7 सालों से 'बाबा शू कंपनी' में काम कर रहा था। जहां मुझे प्रतिदिन 180 रु. मिलते थे लेकिन अब मुझे नहीं पता कि मैं क्या करूं। दुकान जलने के बाद मैं कोई दूसरी नौकरी ढूंढ रहा हूं।

वहीं 'बाबा शू कंपनी' के मालिक सरदार अली खान ने इस मामले पर बताया कि बहादुर ने मुझे कई बार फोन कर पैसे मांगे हैं। लेकिन मैं उसे बस 500 रुपए ही दे सकता हूं पर अब उसे कहीं और नौकरी ढूंढनी होगी।

वहीं सरदार अली ने बताया कि इस हिंसा में 8 लाख रुपए का सामान खराब हो गया। इतने नुकसान के बाद मैं कैसे दोबारा यह दुकान बनाऊंगा?” उनका कहना है कि यहां 6 लोग काम करते थे जिनमें से 4 हिंदू हैं।

ऐसे ही इस हिंसा में मंसूर अहमद की भी दुकान जला दी गई, जिसकी दुकान में 6 हिंदू काम करते थे। इस मामले पर बात करते हुए मंसूर अहमद ने कहा कि वह अपनी ज्यादातर सेविंग अपनी बीवी के इलाज पर खर्च कर चुके हैं, जिसकी 2 साल पहले ही मौत हो गई। इलाज के दौरान मैंने बहुत कर्ज लिया था, जिसे वे अभी तक चुका रहे हैं।

मंसूर का कहना है कि मेरी दुकान में 50 लाख का सामान था और 1.75 लाख रुपए नकद थे जो कि आग में जलकर खाक हो गए। मंसूर ने कहा कि शायद जिन लोगों ने दुकानें जलाईं उनको पता ही नहीं इस दुकान के ज्यादातर कर्मचारी हिंदू हैं।

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