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उन्नाव रेप केस: हाईकोर्ट की फटकार- हिरासत काफी नहीं, विधायक की गिरफ्तारी हो

उन्नाव रेप केस के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने दो मई तक प्रगति रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने कहा सभी आरोपियों की बेल रद्द हो।

उन्नाव रेप केस: हाईकोर्ट की फटकार- हिरासत काफी नहीं, विधायक की गिरफ्तारी हो
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उन्नाव रेप केस के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने दो मई तक प्रगति रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने कहा सभी आरोपियों की बेल रद्द हो। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, विधायक को हिरासत मे लेना काफी नहीं, उसकी गिरफ्तारी हो। उन्नाव मामले में सीबीआई ने बीजेपी के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को हिरासत में लिया है। सीबीआई इस मामले में कुलदीप सिंह सेंगर से पूछताछ करेगी।

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गौरतलब है कि पीड़िता ने सेंगर पर रेप का आरोप लगाया है। सीबीआई ने उन्नाव में भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर द्वारा नाबालिग लड़की से कथित बलात्कार से जुडे तीन मामलों की जांच का जिम्मा संभाल लिया है और आरोपी विधायक को आज सुबह पूछताछ के लिये हिरासत में ले लिया। अधिकारियों ने आज यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीबीआई को कल ही मामले की जांच के आदेश मिले थे।
इसके बाद उसने उत्तर प्रदेश पुलिस की प्राथमिकियों को दोबारा दर्ज करते हुए तुरंत कार्रवाई की और चार बार के विधायक को पूछताछ के लिए सुबह पांच बजे लखनऊ स्थित आपे कार्यालय ले गई। उन्होंने बताया कि विधायक को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।अधिकारियों का दल उस स्थान पर जाएगा जहां अपराध हुआ है। इसके अलावा जेल अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों तथा विधायक के परिजन से पूछताछ करेगा।
इस मामले में पहली प्राथमिकी कथित बलात्कार के संबंध में है जिसमें सेंगर और एक महिला शशि सिंह आरोपी हैं। दूसरी प्राथमिकी हिंसा से और पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में मौत से संबंधित है। हिंसा मामले में चार स्थानीय लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, चूकि पुलिस ने हत्या के आरोप बाद में जोडे हैं इसलिए ये सीबीआई की प्राथमिकी में दर्ज नहीं है।
तीसरा मामला पीड़िता के पिता के खिलाफ उन आरोपों से जुडा है जिसमें उन्हें शस्त्र कानून के तहत गिरफ्तार करके स्थानीय पुलिस ने जेल में बंद कर दिया था । वहां रहस्यमयी हालत में उनकी मौत हो गई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर चोट के निशान पाए जाने की बात सामने आई है। नियम के अनुसार सीबीआई जांच का जिम्मा संभालने पर राज्य पुलिस की प्राथमिकियों को दोबारा दर्ज करती है लेकिन उसे स्वंय कोई निर्णय लेने की स्वतंत्रता होती है।
जिन्हें अंतिम रिपोर्ट में विशेष अदालत में दर्ज कराया जाता है। यह रिपोर्ट क्लोजर रिपोर्ट भी हो सकती है और आरोप पत्र भी। पीडिता का आरोप है कि विधायक ने चार जून 2017 में अपने आवास पर उसके साथ दुष्कर्म किया था जब वह अपने रिश्तेदार के साथ वहां नौकरी मांगने गई थी। पीड़िता के पिता की विधायक के भाई तथा अन्य की कथिततौर पर मारपीट के बाद करीब एक सप्ताह के बाद न्यायिक हिरासत में मौत हो गई थी।
पूरा मामला उस वक्त सुर्खियों में आया जब नाबालिग पीड़िता ने सेंगर के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास के समक्ष रविवार को आत्मदाह का प्रयास किया।
अपने विधायक पर बलात्कार के आरोप लगने से शर्मिंदगी झेल रही योगी आदित्यनाथ सरकार ने कल इन मामलों को केन्द्र के पास भेज दिया था।
लड़की के पिता की मौत के पहले का एक तथाकथित वीडियो वायरल हो गया था जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि पुलिस की मौजूदगी में विधायक के भाई तथा अन्य ने उनके साथ मारपीट की थी। उन्हें रायफल के बट तथा लाठी डंडों से मारा गया था।

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