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योगी सरकार के निर्णय पर मोदी सरकार नाखुश, 17 ओबीसी जातियों को एससी में शामिल करने को बताया अनुचित

उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा प्रदेश की 17 जातियों को ओबीसी से एससी वर्ग में शामिल करने का मामला मंगलवार को राज्यसभा में उठा। प्रदेश की योगी सरकार के इस फैसले को मोदी सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को ऐसा नहीं करना चाहिए, यह एकदम उचित नहीं है।

योगी सरकार के निर्णय पर मोदी सरकार नाखुश, 17 ओबीसी जातियों को एससी में शामिल करने को बताया अनुचित
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Central Government unhappy over Yogi decision Thawar Chand Gehlot says 17 OBC Caste In SC list not proper

उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा प्रदेश की 17 जातियों को ओबीसी से एससी वर्ग में शामिल करने का मामला मंगलवार को राज्यसभा में उठा। प्रदेश की योगी सरकार के इस फैसले को मोदी सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को ऐसा नहीं करना चाहिए, यह एकदम उचित नहीं है।

सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद ने कहा कि किसी वर्ग को एक वर्ग से हटाकर दूसरे वर्ग में शामिल करने का अधिकार संसद को है। संसद में देश के सभी राज्यों से ऐसे प्रस्ताव आते रहते हैं पर सहमति नहीं बन पाती। ऐसे फैसलों अगर पूरी प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता है तो अक्सर मामला कोर्ट तक पहुंच जाता है। फिलहाल ये मामला भी कोर्ट में पहुंच गया है।

राज्यसभा के शून्यकाल में इस मुद्दे को बहुजन समाज पार्टी के नेता सतीश चंद्र मिश्र ने उठाया। उन्होंने कहा कि ओबीसी वर्ग के 17 समुदायों को प्रदेश सरकार द्वारा एससी वर्ग में शामिल करने का फैसला पूरी तरह से असंवैधानिक है। क्योंकि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग में किसी भी तरह के बदलाव का अधिकार केवल संसद को है। बसपा नेता ने कहा कि सविंधान के अनुच्छेद 341 के उपवर्ग 2 के अनुसार संसद की मंजूरी के बाद ही इन वर्गों की सूची में बदलाव संभव होता है।


सतीश चंद्र मित्र की माने तो अब इन 17 जातियों को न ओबीसी वर्ग का फायदा मिलेगा और न ही एससी वर्ग का। अनुसूचित जाति की सूची में बदलाव करने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है। मित्र ने कहा कि बसपा भी चाहती है कि इन 17 जातियों को एससी वर्ग में शामिल किया जाए पर इसके लिए जो निर्धारित प्रक्रिया है उसके अनुसार होना चाहिए। साथ ही उन्होंने अनुपातिक आधार पर एससी वर्ग के कोटे को बढ़ाए जाने की अपील भी की।

गौरतलब है कि 24 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने कश्यप, राजभर, बिंद, धीवर, कहार, कुम्हार, निषाद, केवट, भार, प्रजापति, मल्लाह, बठाम, धीमर, तुरहा, मांझी, गोड़िया और मचुआ जाति के लोगों को एससी वर्ग में शामिल करने का शासनादेश जारी कर दिया। साथ ही जिला मजिस्ट्रेटों और आयुक्तों को आदेश दिया गया कि इन 17 जातियों को जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाए। फिलहाल इस मुद्दे पर विपक्ष सरकार को घेर रही है और केंद्र से अपील की जा रही है कि इस असंवैधानिक आदेश को वापस लिया जाए।

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