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बुलंदशहर हिंसा मामले में आरोपी लोकेंद्र की जमानत याचिका खारिज

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने लोकेंद्र की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह घटना दर्शाती है कि स्वयं राज्य सरकार के अधिकारियों को चुनौती दी गई थी व एक पुलिस अधिकारी की नृशंस हत्या कर दी गई।

बुलंदशहर हिंसा मामले में आरोपी लोकेंद्र की जमानत याचिका खारिज

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बुलंदशहर हिंसा मामले में आरोपी लोकेंद्र की जमानत याचिका मंगलवार को खारिज कर दी। मामले में पुलिस निरीक्षक सुबोध कुमार सिंह की नृशंस हत्या कर दी गई थी। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने लोकेंद्र की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह घटना दर्शाती है कि स्वयं राज्य सरकार के अधिकारियों को चुनौती दी गई थी व एक पुलिस अधिकारी की नृशंस हत्या कर दी गई।

दिसंबर, 2018 में बुलंदशहर की स्याना तहसील में कुछ पशुओं के कंकाल कथित तौर पर बरामद होने के बाद हिंसा भड़क गई थी व कुछ संगठनों का दावा था कि ये कंकाल गायों के थे। न्यायमूर्ति वर्मा ने कहा कि यदि इस तरह के कृत्यों की अनुमति दी जाती है तो इससे अराजकता पैदा होगी व हम ऐसी अंधेर नगरी में चले जाएंगे जहां व्यक्ति कानून अपने हाथ में ले लेगा।

पुलिस अधिकारियों की ऐसे सभी तरह के हमलों व प्रयासों से रक्षा करनी आवश्यक है। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि उस एफआईआर में उसका नाम जांच के दौरान बाद में जोड़ा गया। इसके अलावा, उसके पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ।

अपर शासकीय अधिवक्ता ने जमानत याचिका का इस आधार पर विरोध किया कि यह ऐसा मामला है जहां बेकाबू भीड़ द्वारा पुलिस टीम पर हमला किया गया व लोकेंद्र ने पुलिस अधिकारी की हत्या में प्रत्यक्ष भूमिका अदा की। दिसंबर, 2018 में पुलिस निरीक्षक एसके सिंह के सिर में गोली मारी गई,

जबकि पुलिस टीम द्वारा हिंसक भीड़ से निपटने के दौरान एक प्रदर्शनकारी युवक की मौत हो गई थी। इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम ने मामले में बजरंग दल, भाजपा व विहिप के नेताओं समेत 44 लोगों को आरोपी बनाया था व बाद में उन पर राजद्रोह के आरोप भी लगाए गए थे।

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