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युद्धक टैंक बढ़ाएगा अब जौहर युनिवर्सिटी की शोभा

आजम खान के गृहस्थल में स्थित जौहर युनिवर्सिटी को भारतीय सेना 1971 का इस्तेमाल किया गया युद्धक टैंक दे रही है। जिससे युनिर्वर्सिटी के छात्रों को सेना के हथियारों के बारे में जानकारी दे सके।

युद्धक टैंक बढ़ाएगा अब जौहर युनिवर्सिटी की शोभा
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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान से जल निगम भर्ती घोटाले को लेकर जहां पूछताछ की जा रही है। वहीं दूसरी ओर रामपूर स्थित उनकी यूनिवर्सिटी को भारतीय सेना ने एक बड़ा तौफा दिया है।

जौहर यूनिवर्सिटी को दिया गिफ्ट
सेना ने आजम के जन्मस्थान रामपुर स्थित यूनिवर्सिटी को एक युद्धक टैंक उपहार में दिया है। यह टैंक 1971 में बांग्लादेश लिबरेशन वॉर के दौरान बसंतपुर की लड़ाई में अपना जौहर दिखा चुका है। जौहर यूनिवर्सिटी एक निजी शिक्षण संस्थान है, जिसको आजम चलाते हैं। आजम इस संस्थान के संस्थापक और चासंलर भी हैं।
यूनिवर्सिटी की शान बढ़ाएगा ये टैंक
बांग्लादेश से युद्ध के बाद यह टैंक जौहर यूनिवर्सिटी की शान बढाएगा। बताया जा रहा है इस टैंक को 1971 में बांग्लादेश में युद्ध के दौरान इस्तेमाल किया गया था। इसे भारतीय सेना में 1968 में शामिल किया गया और 2011 तक यह सेवा में रहा।
युद्धक टैंक की खासियत
T-55 युद्धक टैंक का वजन 36 टन है और इसमें एक 100 एमएम कैलिबर गन, 2 7.62 कैलिबर मशीनगन और एक 2.7 एमएम एंटी-एयरक्रॉफ्ट गन लगे हुए हैं। यह रात में भी काम कर सकता है और खुद को किसी भी तरह के न्यूक्लियर, बॉयोलॉजिकल और केमिकल हमलों का सामना करने में सक्षम है।
आजम का कहना है कि उन्होंने इस टैंक की मांग की थी। ताकि उनके यूनिवर्सिटी के छात्र सैन्य द्वारा इस्तेमाल होने वाले टैंक और हथियारों के बारें में जानकारी दी जा सके।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस मांग को वो तब रख पाए क्योकि उनके भारतीय सेना के साथ अच्छे रिश्ते हैं। हालांकि खास बात यह रही कि उसी साल उन पर सेना के खिलाफ अपमानजनक बातें कहने के लिए राष्ट्रद्रोह का मुकदमा भी दर्ज किया गया था।

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