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राम मंदिर पर संतों का केंद्र को नवंबर तक का अल्टीमेटम

नवंबर महीने में यूपी में होने वाली धर्म संसद में भी रामजन्मभूमि के मुद्दे पर प्रमुखता से चर्चा होगी।

राम मंदिर पर संतों का केंद्र को नवंबर तक का अल्टीमेटम
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अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के आनुषांगिक संगठन विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने सरकार को छह महीने का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर वो इस दौरान इस मामले पर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाती है, तो धर्म संसद इस बाबत आगामी कार्यक्रम की घोषणा करेगी।

जिसका वीएचपी पूरी तरह से पालन करेगी। यहां शुक्रवार को इस बाबत आयोजित पत्रकार वार्ता में हरिभूमि संवाददाता द्वारा पूछे गए प्रश्नों के जवाब में वीएचपी के संयुक्त महासचिव डॉ़ सुरेंद्र जैन ने कहा कि राम मंदिर के मुद्दे पर संत समाज के हिसाब से बचे हुए एक मार्ग के हिसाब से केंद्र सरकार को कानून लाना चाहिए।

अगर सरकार ने आगामी नवंबर महीने तक इस पर कोई कदम नहीं उठाया तो धर्म संसद की कर्नाटक के उडुपी में होने वाली बैठक में संत समाज राम मंदिर को लेकर आगे के कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करेगा। जिसे वीएचपी जमीनी स्तर पर लागू करेगी।

धर्म संसद में उठेगा मामला

नवंबर महीने में यूपी में होने वाली धर्म संसद में भी रामजन्मभूमि के मुद्दे पर प्रमुखता से चर्चा होगी। क्योंकि यह मामला अभी देश के स्तर पर एक अहम स्थान रखता है। बीते दिनों राम महोत्सव में भी करोड़ों लोगों ने भाग लिया है।

इसके बाद अब इस विषय को कोई भी दरकिनार नहीं कर सकता है और संतों के चेतावनी देने के बाद तो इस विषय से पीछे हटने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है। हाल ही में हरिद्वार में मार्गदर्शक मंडल की भी बैठक हुई थी। इसमें शमिल 200 संतों ने राम मंदिर के मुद्दे पर कानून लाने की बात कही थी।

कानून बनाने के पक्ष में SC

डॉ़ जैन ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय भी इस मामले में चाहता है कि इस विषय पर कानून बनाया जाना चाहिए। क्योंकि समाज में बातचीत के लिए मौजूद दोनों समाजों में से एक मुस्लिम पक्ष न तो पहले और न ही आज रामजन्मभूमि के मुद्दे पर बातचीत करने के लिए तैयार नहीं है।

उनका कहना है कि इस पर सुको को फैसले के साथ सामने आना चाहिए। अब तक दो बार यह मुद्दा कोर्ट के सामने जा चुका है। पहली बार नरसिंहा राव के प्रधानमंत्रित्व काल में और दूसरा अब डॉ़ सुब्रमण्यम स्वामी इसे कोर्ट के सामने तत्काल सुनवाई के लिए लेकर गए हैं।

दोनों बार कोर्ट ने कहा है कि हम इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करेंगे। इसलिए इसे आपसी वार्ता से ही सुलझाया जाए। मुस्लिम पक्ष वार्ता के लिए तैयार नहीं है। इसलिए अब दूसरा रास्ता कानून बनाने का ही बचता है। यह एक प्रकार से कोर्ट के उत्साह को जाहिर करता है।

मंदसौर की घटना पर कांग्रेस को लताड़ा

वीएचपी के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने राम मंदिर के अलावा मप्र के मंदसौर में हुई घटना को लेकर कांग्रेस को लताड़ लगाते हुए कहा कि उसे किसानों के मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। किसान यानि अन्नदाता का सड़कों पर उतरना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

लेकिन राजनीति से नहीं उतरना चाहिए। कांग्रेस को इस तरह के आंदोलन में दखल नहीं देना चाहिए। शुरुआती प्रक्रिया प्रशासनिक चूक की तरफ इशारा करती है। लेकिन हकीकत का खुलासा जांच का परिणाम आने के बाद होगा। लेकिन वीएचपी का कहना है कि दोषियों को सजा दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कृषि राज्य का विषय है। लेकिन केंद्र को इस पर राष्ट्रीय नीति बनानी चाहिए। सरकार को स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट पर भी विचार करना चाहिए और गंभीरता से किसानों की मांग पर विचार करना चाहिए।

वीएचपी इस मामले में जब कांग्रेस के षडयंत्र की बात कर रही है तो कुछ उदाहरणों के साथ उसे स्पष्ट कर देना चाहती है। पहला भिंडरावाला को किसने खड़ा किया, गुजरात में सबसे बड़ा दंगा हितेन देसाई के समय में हुआ था,

जो मोरारजी देसाई से जुड़े हुए थे। सहारनपुर के दंगे के पीछे भी राजनीति है। यह स्पष्ट हो चुका है। कोई भी पार्टी देशहित से ऊपर नहीं है।

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