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गोरखपुर ट्रेजडीः अभी और बच्चों की होगी मौत, वजह है नीति

भारत की सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य में केवल 529 प्राइमरी हेल्थ सेंटर है।

गोरखपुर ट्रेजडीः अभी और बच्चों की होगी मौत, वजह है नीति
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुई 85 बच्चों की मौत के लिए सरकार और जांच एजेंसी ऑक्सीजन की कमी को जिम्मेदार मन रहे हैं। इस बारे में बात करते हुए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि बीआरडी अस्पताल में हुए इस हादसे की वजह गंदगी और खुले में शौच है।

गोरखपुर में एक वरिष्ठ अस्पताल के अधिकारी ने नाम ना बताया की शर्त पर एफपी को बताया कि बच्चों की मौत साधारण ऑक्सीजन समस्या नहीं है बच्चों की मौत से जुड़ी जड़ें बहुत गहरी हैं। इस सिस्टम को खत्म करने की जरुरत है। भारत 2014 में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का मात्र 1.4 प्रतिशत खर्च ही कर रहा था। जो दुनिया के कई देशों के सामने बहुत ही कम है।

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उन्होंने इस समस्या के पीछे यूपी में हेल्थ सेंटरों की कमी को भी जिम्मेदार ठहराया है। भारत की सबसे ज्यादा आबादी वाले इस राज्य में केवल 529 प्राइमरी हेल्थ सेंटर हैं और एसिफिलितेस से उपचार के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, इसकी वजह से हजारों बच्चों की हर साल मौत हो जाती है।

मानसून के दौरान राज्य के निचले इलाकों में हर साल मच्छर से होने वाली बीमारी के बावजूद सिर्फ पांच पादरीचिकित्सक और 22 एन्सेफलाइटिस उपचार केंद्र हैं। भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश और बिहार हर साल एंसेफेलाइटिस से तबाह हो रहे हैं।

मुख्य रूप से बच्चों को कुपोषण से प्रभावित करने वाली बीमारी, मस्तिष्क की सूजन का कारण बनती है और सिरदर्द, बुखार और यहां तक ​​कि बच्चों का मस्तिष्क क्षति भी हो सकता है।

प्रोफेसर के.पी. कुशवाहा, जो 2015 के मध्य तक बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार को अब इस क्षेत्र में कम से कम पांच ऐसे अस्पतालों के निर्माण करने की जरूरत है ताकि इस लोड को पूरा किया जा सके और बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकें।

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ये घटना हादसे में मृत बच्चों के कई परिजनों से साथ घटी है। हम आपको बता रहे है इन पीड़ित परिजनों की दुःख भरी दास्तां ...........

बिहार के गोपाल गंज के रहने वाले राजभर अपने 4 दिन के बच्चे को बेहतर इलाज की उम्मीद में गोरखपुर के बीआरडी हॉस्पिटल में लेकर आए थे। रजभर ने अपने बच्चे को गुरूवार को शाम 3 बजे भर्ती कराया था और दूसरे दिन शाम 6 बजे उसकी मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने बच्चों की बॉडी देने से मना कर दिया।

ऐसा ही हादसा लोरिक यादव के साथ भी हुआ है। लोरिक कुशीनगर से अपने 15 दिन के बच्चे का इलाज करवाने के लिए गोरखपुर आए थे।

सिद्धार्थनगर के रामसकल बझी अपनी 15 दिनों की बच्ची का इलाज कराने बीआरडी हॉस्पिटल पहुंचे थे। लेकिन बच्ची की मौत के बाद भी डॉक्टर ने उन्हें बॉडी देने से मन कर दिया। डॉक्टर ने कहा कि पहले मंत्री जी को आने दो।

गोरखपुर के ही रहने वाले जाहिद की 5 साल की बेटी खुशी ने भी देखते ही देखते दम तोड़ दिया। लेकिन मीडिया के दबाव के बाद रात करीब साढ़े 12 बजे उन्हें डेड बॉडी दी गई।

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