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जैसे-तैसे सहारनपुर में पुलिस वालों ने दंगाइयों से बचाई जान

घटना के दौरान तीन पुलिसकर्मी समेत कई घायल हुए।

जैसे-तैसे सहारनपुर में पुलिस वालों ने दंगाइयों से बचाई जान
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उत्तरप्रदेश का सहारनपुर फिर एक बार सुलगा है। सहारनपुर के बड़गांव में महाराणा प्रताप जंयती पर शोभायात्रा के दौरान दलितों और ठाकुरों के बीच नोक झोंक हुई थी जिसमें एक युवक की मौत हो गई थी। इस घटना के विरोध में मंगलवार को कई दलित संगठन गांधी पार्क में जमा हुए।

पुलिस द्वारा उन्हें हटाए जाने पर प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए। उन लोगों ने पथराव किया और पुलिस चौंकी भी फूंक दी। प्रदर्शनकारियों ने दर्जनों बाइकों, कारों और बसों में भी आग लगा दी।
इसके बाद एडीएम, एसडीएम और पुलिस अफसरों ने भागकर अपनी जानें बचाईं, कई पुलिसवालों को तो इससे बचने के लिए आवासीय कॉलोनियों में छुप गए। घटना के दौरान तीन पुलिसकर्मी समेत कई घायल हुए। एएसपी राहुल श्रीवास्तव ने ट्वीट कर ये जानकारी दी और घटना के बाद दोनों अडिशनल एसपी का ट्रांसफर कर दिया गया।
बाताया जा रहा है कि सहारनपुर में हुई ये घटना सुनियोजित थी। पुलिस के मुताबिक बवाल की शुरुआत गांधी पार्क से होनी थी जिसके बाद बवाल करने की योजना बनाई गई थी। दलित समाज के रविदास छात्रावास ने 'भीम आर्मी' के नेतृत्व में महापंचायत का ऐलान किया था।
ये पंचायत महाराणा प्रताप जंयती के अवसर पर होनी थी लेकिन प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी थी। भीम आर्मी ने शब्बीरपुर वारदात के बाद वॉट्सऐप ग्रुप से युवाओं को संदेश देकर पंचायत में आने के लिए जमा किया। सोशल साइट पर ये जानकारी एक दूसरे के साथ शेयर की गई थी।
योजना के मुताबिक मंगलावार को सभी प्रदर्शनकारी छात्रावास में जमा हुए और पुलिस के सख्ती करने के बाद भीड़ गांधी मैदान पहुंची, वहां पुलिस ने भीड़ को दौड़ा लिया और कुछ युवकों को हिरासत में भी लिया। भीम आर्मी के संस्थापक का कहना है कि पुलिस ने फालतू लाठीचार्ज किया जिसके खिलाफ प्रदर्शन किया गया।

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