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गोरखपुर में बच्चों की मौत के जिम्मेदार ऑक्सिजन सप्लायर: DM रिपोर्ट

राजीव मिश्रा को कंपनी को बकाया रुपया भुगतान न करने के लिए दोषी ठहराया गया है।

गोरखपुर में बच्चों की मौत के जिम्मेदार ऑक्सिजन सप्लायर: DM रिपोर्ट
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उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ के शहर गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई बच्चों की मौत के मामले में डीएम की ओर से दी गई रिपोर्ट नए विवाद को जन्म दे सकती है। रिपोर्ट में ऑक्सिजन सप्लायर को दोषी ठहराया गया है। जबिक स्थानिय प्रशासन द्वारा की गई जांच में बच्चों की मौतों का सही कारण नहीं बताया गया है।

लेकिन योगी सरकार बच्चों की मौतों के लिए ऑक्सिजन की कमी को जिम्मेदार मानने से इंकार कर रही है। डीएम रिपोर्ट के अनुसार ऑक्सिजन की खरीद और रीफिलिंग से जुड़ी लॉग बुक में कई जगह ओवर राइटिंग है। रिपोर्ट में पुष्पा सेल्स को लिक्विड ऑक्सिजन की सप्लाइ रोकने का जिम्मेदार ठहराया गया है।

रिपोर्ट में 10 अगस्त को प्रिंसिपल डॉ आरके मिश्रा और एनिसथीजिया डिपार्टमेंट के हेड डॉ सतीश कुमार की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं। डॉ सतीश कुमार पर बीआरडी मेडिकल कॉलेज के विभिन्न वॉर्ड्स में ऑक्सिजन की सप्लाइ कायम रखने की जिम्मेदारी थी।

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डीएम ने अपनी रिपोर्ट में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी पुष्पा सेल प्राइवेट लिमिटेड, ऑक्सीजन यूनिट के इंचार्ज डॉक्टर सतीश और ऑक्सीजन खरीदने वाली समिति के अध्यक्ष को जिम्मेदार ठहराया है।

हालांकि ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाले फर्म का कहना है कि अस्पताल को ऑक्सीजन की आपूर्ति का अनुबंध मार्च में ही समाप्त हो गया था। उसके बाद अनुबंध का नवीनीकरण नहीं किया गया।

डीएम ने रिपोर्ट में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा को भी दोषी बताया है। राजीव मिश्रा को कंपनी को बकाया रुपया भुगतान न करने के लिए दोषी ठहराया गया है।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के बाद प्रिंसिपल राजीव मिश्रा को लापरवाही और प्रशासनिक कमियों के चलते पहले ही निलंबित कर दिया गया था।

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रिपोर्ट कहती है, मेडिकल कॉलेज में ऑक्सिजन सिलिंडर के स्टॉक बुक में कई जगह ओवरराइटिंग है। यहां तक कि जिस लॉग बुक को डॉ सतीश द्वारा मेंटेन रखना था, उस पर न ही हस्ताक्षर हैं और न ही अंगूठे के निशान। रिपोर्ट के मुताबिक, लॉग बुक में सिलिंडरों से जुड़े आंकड़ों में अनियमितताएं वित्तीय गड़बड़ियों की ओर इशारा करती हैं।

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