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''बालिग हैं तो अपनी मर्जी से कर सकते हैं विवाह''

बालिग होने पर कोई नहीं थोप सकता है शर्तें।

बालिग हैं तो अपनी मर्जी से कर सकते हैं विवाह
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आर्य समाज मंदिरों में होने वाली शादियों पर गाइडलाइन बनाने के हाईकोर्ट के एकल पीठ के आदेश को युगल पीठ ने निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि संविधान में बालिगों को अपने बारे में फैसला लेने का हक है। कोर्ट ने कहा कि बालिगों को विवाह के संबंध में निर्णय लेने का पूरा हक है और उनपर किसी तरह की कोई शर्त नहीं थोपी जा सकती।

ग्वालियर में नरेश सोनी नाम के शख्स ने हाईकोर्ट की एकल पीठ में एक हेवियस कॉर्पस दर्ज कर बताया था कि उनकी बेटी गुम हो गई है। उन्होंने बताया कि उसे ढूंढने में पुलिस भी मदद नहीं कर रही है। जब पुलिस ने खोज-बीन करने के बाद उनकी बेटी को कोर्ट में पेश किया तो उसने बताया कि वो आर्य समाज मंदिर में शादी कर चुकी है।
तब हाईकोर्ट की एकल पीठ ने इस विवाह को ये कहकर निरस्त कर दिया कि आर्य मंदिर में विवाह करना मान्य नहीं है क्योंकि ये अनुयायी है। इसको लेकर एकल पीठ ने एक गाइडलाइन तैयार की जिसके अनुसार ही कोई जोड़ा आर्य समाज मंदिर में विवाह कर सकेगा।
इस आदेश पर नया बाजार मंदिर ने रिट दायर कर दी और कहा कि बालिग युवक-युवती विवाह करने के लिए स्वतंत्र हैं। युगल पीठ ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का हवाला देकर एकल पीठ के आदेश को निरस्त कर दिया।

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