पश्चिम बंगाल में चुनाव की घोषणा के साथ ही प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। चुनाव आयोग ने राज्य के डीजीपी, मुख्य सचिव, गृह सचिव और कोलकाता पुलिस कमिश्नर समेत आधा दर्जन से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला कर दिया है।

आयोग का कहना है कि यह फैसला आगामी चुनावों को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए लिया गया है। वहीं राजनीतिक गलियारों में इस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

पिछली बार पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में मतदान हुआ था, जबकि इस बार केवल दो चरणों में चुनाव कराने का फैसला भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

सबसे बड़ा सवाल यही है-
क्या यह सख्त कार्रवाई वास्तव में निष्पक्ष चुनाव की तैयारी है या इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश भी छिपा है?

इसी मुद्दे पर हरिभूमि और INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी के साथ विशेष चर्चा में राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं और चुनाव विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी।

चर्चा में शामिल हुए

  • प्रेम कुमार – वरिष्ठ पत्रकार
  • कुशल पांडेय – प्रवक्ता, भाजपा
  • डॉ. आलोक शुक्ल – पूर्व उप चुनाव आयुक्त
  • सुमित मेहरोत्रा – प्रवक्ता, तृणमूल कांग्रेस

इस खास पेशकश में किसने क्या कहा?  ऊपर दिए गए वीडियो में देखिए पूरी बहस।