LPG Crisis in India: मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्षों का असर अब भारतीय उपमहाद्वीप पर भी दिखाई देने लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को एक अप्रत्याशित चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। एलपीजी (LPG) की कमी के कारण मोबाइल टावरों के निर्माण पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि फिलहाल देशभर में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं सामान्य रूप से चल रही हैं, लेकिन इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या के चलते नए टावरों की स्थापना की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
दरअसल, सरकार ने एलपीजी आपूर्तिकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे व्यावसायिक उपयोग की बजाय घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दें। इसके बाद टेलीकॉम सेक्टर से जुड़े उद्योग संगठनों ने चिंता जताई है कि अगर यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो नेटवर्क विस्तार में देरी हो सकती है। खासकर उन इलाकों में जहां टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर अभी विकसित हो रहा है और बेहतर मोबाइल कनेक्टिविटी की मांग लगातार बढ़ रही है।
मोबाइल नेटवर्क पर मंडरा रहा संकट?
मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं में संभावित व्यवधान को लेकर चिंता जताई जा रही है, जिसका कारण एलपीजी की कमी को बताया जा रहा है। यह समस्या तब सामने आई जब Digital Infrastructure Providers Association (DIPA) ने पुष्टि की कि टेलीकॉम टावर बनाने वाली कंपनियों को 5 मार्च से एलपीजी की आपूर्ति रोक दी गई है।
यह स्थिति पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के उस निर्देश के बाद बनी, जिसमें ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को एलपीजी की आपूर्ति केवल घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता के आधार पर करने को कहा गया। इस कदम का उद्देश्य घरेलू जरूरतों को पूरा करना था, लेकिन इससे उन उद्योगों पर असर पड़ा है जो अपने उत्पादन में एलपीजी को प्रमुख ईंधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
इस कारण रुक सकता है टावर निर्माण
टेलीकॉम टावरों के निर्माण में एलपीजी का इस्तेमाल ‘गैल्वनाइजेशन’ (Galvanisation) नामक प्रक्रिया में किया जाता है। इस प्रक्रिया के जरिए टावरों को जंग और खराब मौसम से सुरक्षित बनाया जाता है। इसमें स्टील के हिस्सों को बेहद उच्च तापमान पर पिघले हुए जिंक से भरे कंटेनर में डुबोया जाता है, जिससे उन पर जिंक की परत चढ़ जाती है। इससे टावर लंबे समय तक मजबूत रहते हैं और खराब मौसम का सामना कर पाते हैं।
लेकिन इतनी अधिक तापमान बनाए रखने के लिए लगातार ईंधन की जरूरत होती है, जो आमतौर पर एलपीजी या एलएनजी हीटर से मिलती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल कुछ मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स कम तापमान पर काम चला रही हैं ताकि जिंक तरल अवस्था में बना रहे और उपकरणों को नुकसान न पहुंचे। हालांकि यह व्यवस्था केवल सीमित समय तक ही चल सकती है।
अगर एलपीजी की आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है तो फैक्ट्रियों को गैल्वनाइजेशन बाथ से पिघले हुए जिंक को निकालकर अस्थायी रूप से उत्पादन बंद करना पड़ सकता है। ऐसे प्लांट्स को दोबारा शुरू करने में काफी समय लग सकता है, जिससे टेलीकॉम टावरों के उत्पादन में देरी हो सकती है।
इस मामले को लेकर DIPA ने टेलीकॉम सचिव अमित अग्रवाल को पत्र लिखकर तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन ने दूरसंचार विभाग से पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ समन्वय कर टावर निर्माण इकाइयों के लिए ईंधन आपूर्ति बहाल कराने की अपील की है। साथ ही एहतियात के तौर पर टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बिजली आपूर्ति को भी प्राथमिकता देने का अनुरोध किया गया है।