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ई-कार्मस से सुधरेंगे डाकघरों के हालात, फ्लिपकार्ट के साथ जुड़ा भारतीय डाक

बदहाली और लचर हालत में चल रहे देश के डाक घरों की सेहत जल्द ही दुरुस्त होने वाली है।

ई-कार्मस से सुधरेंगे डाकघरों के हालात, फ्लिपकार्ट के साथ जुड़ा भारतीय डाक

बेंगलुरु. बदहाली और लचर हालत में चल रहे देश के डाक घरों की सेहत जल्द ही दुरुस्त होने वाली है। ई-कॉर्मस कंपनियों और डाक विभाग में आपस में हाथ मिलाया है। डाक घर की पहुंच उन जगहों तक हैं जहां कुरियर कंपनियों अभी भी पहुंच से दूर हैं। डाकघर के इसी व्यापक नेटवर्क का लाभ ई-कार्मस कंपनियां लेना चाहती हैं।

ज्ञात हो कि वर्ष 2013-13 में डाक विभाग की सालाना आय में वर्ष करीब 5,400 करोड़ रुपए की कमी आई। लि हाजा, अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने को लेकर डाक विभाग फिक्रमंद हो गया है। डाक सेवा परिषद के सदस्य जॉन सैमुअल ने बताया ािक जिस गति से ई-कॉर्मस का दायरा बढ़ रहा है, हमें उम्मीद है कि आने वाले तीन से चार साल में हमें 3000-4000 करोड़ रुपए का राजस्व मिलेगा। हमने कुछ महीने पहले ही शुरुआत की है और आने वाले महीनों में व्यापार बढ़ेगा ही। भारत की स्वदेशी ई-कॉर्मस कंपनी फ्लिपकार्ट को उम्मीद है कि डाक विभाग के साथ मिल कर वो अपने कारोबार को और बढ़ाने में सफल रहेगी।
फ्लिपकार्ट की आपूर्ति श्रृंखला के वरिष्ठ निदेशक नीरज अग्रवाल कहते हैं, पिछले एक साल में हमें भारत के शीर्ष 30 शहरों से 60-70 फीसदी काम मिल रहा था। आज यह मांग घटकर 50 फीसदी हो गई है और छोटे और मध्यम शहरों से मांग 20 फीसदी बढ़ गई है। हमें लगता है कि अगले दो साल में यह मांग बढ़ कर कम से कम 30-40 फीसदी हो जाएगी। अग्रवाल कहते हैं, शायद इस पर यकीन मुश्किल हो सकता है।
लेकिन इस योजना में डाक विभाग की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। वह हर पिन कोड में मौजूद हैं। कूरियर कंपनियां पांच या छह पिन कोड में ही हैं। हमें लगता है कि जितना ज्यादा हम डाक विभाग के साथ मिलकर काम करेंगे, अर्थव्यवस्था और ई-कॉर्मस के लिए उतना ही अच्छा होगा।
नीचे की स्लाइड्स में जानिए, तेजी से घटी है डाक विभाग की आमदनी -
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