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धोखेबाजों के हाथ या उंगलियां काट देनी चाहिए: मद्रास कोर्ट

उन्‍होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे देश में जाली कागजात बनाने वाले अपराधियों के उंगलियां काट देने का कोई कानून नहीं है।

धोखेबाजों के हाथ या उंगलियां काट देनी चाहिए: मद्रास कोर्ट
चेन्‍नई. एक मामले की सुनवाई के दौरान मद्रास हाई कोर्ट के जज ने कहा कि धोखेबाजों की उंगलियां और उनके हाथ काट दिए जाने चाहिए। मद्रास हाई कोर्ट के सिटिंग जज एस वैद्यनाथन जमीन की धोखाधड़ी मामले की सुनवाई कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हाल ही में मैंने इरान में अपराधियों की सजा पर एक लेख पढ़ा। इरान में धोखाधड़ी करने वालों के लिए नई सजा तय की गई है। ऐसे लोगों की एक मशीन से उंगलियां काट दी जाती हैं।
शिराज की अदालत में ऐसे अपराधियों की उंगलियां काटने के लिए एक मशीन रखी गई है। उन्होंने अफसोस जताया कि ऐसा कानून हमारे देश में नहीं है। उन्होंने कहा कि नकली कागजात बनाने वाले धोखेबाजों के लिए हमारे देश में भी ऐसा कानून होना चाहिए। अगर इस तरह के कड़े कानून होंगे तो अपराधी ऐसी जालसाजी नहीं करेंगे। पी एम ऐलावरसन नाम के एक शख्‍स ने संपत्ति के एक मामले में कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
उसने अदालत से मांग की थी कि उसकी संपत्ति के लिए पंजीयन संख्‍या आवंटित करने और दस्तावेज जारी करने के लिए कोर्ट सैदापेट जिला पंजीयक और वीरूगमबक्कम सब-रजिस्ट्रार को निर्देश दे। गौरतलब है कि अधिकारियों ने ऐलावरसन पर संपत्ति से जुड़े कागजात के साथ फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाते हुए कागजात जब्‍त कर लिए थे। अधिकारियों का कहना है कि यह संपत्ति वीवीवी नचियप्‍पन नाम के किसी शख्‍स की है।
ऐलावरसन के वकील ने इस पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि अधिकारियों के पास संपत्ति के स्वामित्व की जांच की शक्ति नहीं है और वे पंजीकृत दस्तावेजों को लौटने के लिए बाध्य हैं। जस्टिस विद्यानाथन ने ऐलावरसन की इस मांग को खारिज कर दिया और कहा कि यह सीधे तौर पर संपत्ति हड़पने का मामला है। कोर्ट ने इस बात पर भी आश्‍चर्य जताया कि कैसे ऐलावरसन ने जालसाजी और धोखाधड़ी को अंजाम देने के बावजूद अदालत का दरवाजा खटखटाकर दुस्साहस दिखाया है।
नीचे की स्लाइड्स में जानिए, और क्‍या कहा मद्रास हाई कोर्ट के जज ने -
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