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जानिए, तमिलनाडू की मुख्यमंत्री जयललिता का राजनितिक सफर

जयललिता का राजनितिक सफर हमेशा ही विवादों से भरा हुआ रहा है।

जानिए, तमिलनाडू की मुख्यमंत्री जयललिता का राजनितिक सफर

नई दिल्ली। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता पर भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध हो गए है। वो भारत की सबसे खूबसूरत और विवादों से घिरी हुई मुख्यमंत्री रही है। उनपर आय से अधिक संपत्ति के आरोप लगते रहे है। आज बैंगलोर की विशेष अदालत ने भी इन आरोपों पर अपनी मुहर लगा दी है। उनपर आय से अधिक संपत्ति का आरोप उनके पहले मुख्यमंत्री कार्यकाल में लगे थे। उन्हें चार साल की सजा हुई है साथ ही उनपर 100 करोड़ का जुर्माना भी ठोंका गया है।
उन्होने सरकारी खज़ाने से कभी एक रूपए से ज्यादा नही लिए फिर भी उनकी संपत्ति में दिन-प्रतिदिन इजाफा होता गया। उन्होने सरकार से केवल एक रूपए की तनख्वाह ली फिर भी इतनी आय कहा से एकत्रित की? ये सवाल हमेशा से ही चर्चा में रहा है। अब आरोप सिद्ध होने के बाद उन्हे मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पडेगा।
हालांकि जयललिता ने हमेशा ही अपने ऊपर लगे आरोपों को राजनीतिक रंजिश करार दिया है। जयललिता को उनके समर्थकों द्वारा अम्मा कहकर बुलाया जाता है। वे हमेशा से ही अपनी भव्य जीवनशैली की वजह से चर्चा का विषय रहीं है।
अम्मा ने 1982 में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्ना द्रमुक) की सदस्यता ग्रहण करते हुए एम॰जी॰ रामचंद्रन के साथ अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। 1983 में उन्हें पार्टी का प्रोपेगेंडा सचिव नियुक्त किया गया था। अंग्रेजी पर अच्छी पकड़ होने की वजह से पार्टी प्रमुख रामचंद्रन ने उन्हें राज्यसभा भेजा। इसके बाद राज्य विधानसभा का उपचुनाव जीतकर विधानसभा सदस्य बनी।1984 से 1989 तक वे तमिलनाडु से राज्यसभा की सदस्य रहीं। 1984 में जब मस्तिष्क के स्ट्रोक के चलते रामचंद्रन अक्षम हो गए तब जया ने मुख्यमंत्री बनना चाहा, तो रामचंद्रन ने उन्हें पार्टी के उप नेता पद से हटा दिया।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, जयललिता के राजनीतिक सफऱ से जुड़ी और जानकारी-
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