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श्रीलंका में सरकार बदलने के बाद भी हालात में बदलाव नहीं, तमिलों पर अन्याय जारीः करुणानिधि

तमिलनाडु में श्रीलंका सेना का कब्जा जारी रहने के कारण तमिलों को अन्याय झेलना पड़ रहा है।

श्रीलंका में सरकार बदलने के बाद भी हालात में बदलाव नहीं, तमिलों पर अन्याय जारीः करुणानिधि
चेन्नई. तमिलनाडु में श्रीलंका सेना का कब्जा जारी रहने के कारण तमिलों को अन्याय झेलना पड़ रहा है। विपक्षी दल द्रमुक ने तमिलों के पारंपरिक इलाके में सेना का कब्जा जारी रहने की रिपोर्ट पर चिंता व्यक्त की है। द्रमुक ने शनिवार को बयान में कहा था कि वहां की सरकार बदलने के बाद भी हालात में कोई बदलाव नहीं हुआ। तमिलों पर अन्याय लगातार जारी है।
पार्टी प्रमुख एम करुणानिधि ने बताया कि श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरीसेन ने तमिलों के समर्थन से चुनाव जीतने में कामयाब हो गये है। चुनाव से पहले उन्होंने तमिल प्रभाव वाले क्षेत्रों से सेना हटाने का वादा किया था। कैलिफोर्निया स्थित ओकलैंड इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के हवाले से खबर है कि वहां अब भी 1.6 लाख श्रीलंकाई सैनिक मौजूद हैं, जिनमें अधिकतर सिंहली हैं।
द्रमुक नेता के मुताबिक रिपोर्ट से स्पष्ट है कि नए राष्ट्रपति के आने के बाद भी तमिलों के खिलाफ अन्याय कम नहीं हुआ है। एक बयान में करुणानिधि ने बताया कि उन्होंने सिरीसेन के सत्ता संभालने के बाद इस साल फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था, जिसमें तमिलों के अधिकार के लिए वहां भारत के हस्तक्षेप की जरूरत को बताया था। उन्होंने अपनी इस मांग को फिर दोहराया है। श्रीलंका की राजनीति में वापसी का प्रयास कर रहे पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने अलगाववादी तमिल संगठन लिट्टे के फिर संगठित होने और देश में आतंकवाद के पुनर्जीवित होने की आशंका जताई है।
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