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असम में बाढ का कहर जारी, प्रभावित राज्‍यों में संक्रामक रोगों का खतरा बढा

एशिया के सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली और सदिया महकमा शेष देश से कट गया है। माजुली के 83 गांवों के लगभग 50 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

असम में बाढ का कहर जारी, प्रभावित राज्‍यों में संक्रामक रोगों का खतरा बढा

नई दिल्‍ली. उत्‍तर भारत में अब बाढ़ का असर कम होने लगा है किंतु जाती हुई बाढ़ अपने पीछे संक्रामक रोगों का कहर छोड़े जा रही है। इस बीच पूरे उत्तर भारत में मानसून की कमजोर स्थिति दिखाई दे रही है और पंजाब, हरियाणा, दिल्ली तथा जम्मू में बारिश का नामोनिशान नहीं है। तेज गर्मी से लोग परेशान हैं। हालांकि बाढ़ का पानी अब उतार की ओर है किंतु उत्तर प्रदेश के 653 गांवों के 4.91 लाख लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। ऊपरी असम में बाढ़ की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

ब्रह्मापुत्र खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इसके साथ ही एशिया के सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली और सदिया महकमा शेष देश से कट गया है। माजुली के 83 गांवों के लगभग 50 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। काजीरंगा की स्थिति पहले जैसी ही है। उधर बह्मापुत्र के रौद्र रूप को देखकर डिब्रूगढ़वासी शंकित हैं।बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नदियों का जलस्तर घटते ही संक्रामक बीमारियों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। कई जिलों हजारों लोग उल्टी, दस्त और बुखार की चपेट में हैं। कई क्षेत्रों में नदियों की कटान अब भी लोगों को परेशान किए हुए है।

गोंडा के तरबगंज व कर्नलगंज क्षेत्र में सोमवार को 505 लोग संक्रमण से बीमार पड़ गए। बलरामपुर में राप्ती नदी का कहर तो थमा गया है, लेकिन यहां भी कई गांवों में संक्रामक रोग का प्रकोप फैल रहा है। बहराइच और श्रावस्ती में कटान से प्रभावित लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश में हैं। बाराबंकी में घाघरा आधा दर्जन गांवों में तबाही मचा रही है। अंबेडकरनगर में 150 से अधिक ग्रामीण उल्टी, दस्त से पीड़ित हैं। सीतापुर में भी कई गांवों के दर्जनभर लोग बीमारियों से पीड़ित हैं। गोरखपुर-बस्ती मंडल में नदियां स्थिर हैं। बाढ़ का पानी भी घट गया है, लेकिन कटान ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उधर, बलिया, आजमगढ़ और मऊ में भी नदियों का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। इलाहाबाद में यमुना और गंगा के जलस्तर में भी लगातार कमी दर्ज की जा रही है।
नीचे की स्लाइड्स में देखिए, नार्थ इंडिया में बाढ का कहर -

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