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पैलेट गन इस्तेमाल करना हमारी मजबूरी: सीआरपीएफ

अर्धसैनिक बल 2010 से पैलेट गन का इस्तेमाल कर रहे है।

पैलेट गन इस्तेमाल करना हमारी मजबूरी: सीआरपीएफ
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नई दिल्ली. कश्मीर में लोगों पर पैलेट गन चलाने को लेकर चल रहे मामले में एक नया मोड़ आया है। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने सीआरपीएफ से इस मामले में जवाब मांगा था। एक याचिका के तहत इस ओर कार्रवाई की गई है। बता दें कि सीआरपीएफ ने बुधवार को एक ऐफिडेविट के जरिए कोर्ट को इस मामले में जवाब दिया है। कश्मीर हाइकोर्ट बार एसोसिएशन ने 30 जुलाई को यह याचिका डाली थी।
भीड़ को नियत्रिंत करने के लिए पैलेट गन ही है ऑप्शन
बता दें कि अर्धसैनिक बल ने याचिका के जवाब में कोर्ट को एक एफिडेविट के जरिए पैलेट गन के इस्तेमाल पर जवाब दिया है। जानकारी के मुताबिक, याचिका में पैलेट गन पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। गौरतलब है कि 8 जुलाई को कश्मीर में हिजबुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद राज्य में पैलेट गन का पूरजोर तरीके से इस्तेमाल किया गया था।
2010 से हो रहा है पैलेट गन का इस्तेमाल
जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के विरोध को रोकने के लिए 2010 से पैलेट गन का इस्तेमाल किया जा रहा है। घाटी में बुरहान वाही की मौत पर लोगों में काफी गुस्सा फूट चुका था जिसके चलते लोगों और पुलिस में भारी मुठभेड़़ देखने को मिली थी। सीआरपीएफ का कहना है कि इस मुठभेड़ में हमने 3500 पैलेट गन को निकाल दिया था।

कल होगी केस पर सुनवाई
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, लोगों का कहना है कि हमारा न्यायपालिका पर से विश्वास उठता जा रहा है। हम पैलेट गन पर जनहित याचिका वापस लेना चाहते हैं। पैलेट गन के मामले में सीआरपीएफ और बीएसएफ ने अपने जवाब दे दिए है लेकिन राज्य सरकार ने इस ओर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
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