Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

14 साल बाद, इरोम शर्मिला के रिहा होने की बंधी आस

शर्मिला के भाई इरोम सिंघजीत ने इंफाल से कहा कि कानून बदलने के बाद सरकार को शर्मिला को रिहा करना होगा।

14 साल बाद, इरोम शर्मिला के रिहा होने की बंधी आस

कोलकाता. आत्महत्या की कोशिश को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने के केंद्र के निर्णय के साथ पिछले 14 साल से आमरण अनशन कर रही मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम चानू शर्मिला की रिहाई की आस बंध गई है। शर्मिला के भाई इरोम सिंघजीत ने इंफाल से कहा, हम यह जानकर खुश हैं कि कानून बदलने के बाद सरकार को शर्मिला को रिहा करना होगा। जो हो, निर्दयी सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ्सपा) को खत्म करने के लिए वह अपना संघर्ष जारी रखेंगी।

बहरहाल, परिवार इस बात को लेकर भी चिंतित है कि मणिपुर की लौह महिला का तब क्या होगा, जब उन्हें इंफाल के जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में नाक से पाइप के जरिए जबरन भोजन नहीं दिया जाएगा। यही खास वार्ड उनके लिए जेल की तरह है। उन्होंने कहा, ऐसी स्थिति में निश्चित ही उनकी जान को खतरा होगा लेकिन वह अपना उपवास जारी रखेंगी। उनका संकल्प बहुत मजबूत है।

अफ्सपा हटाने की मांग करते हुए 42 वर्षीय शर्मिला ने नवंबर 2000 से ही खाने या कुछ भी पीने से मना कर दिया। खुदकुशी के प्रयास के आरोपों के तहत उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में रिहा किया गया और समय समय पर उन्हें फिर से गिरफ्तार किया गया।

नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, घटना से जुड़ी अन्य बातें -
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-
Next Story
Share it
Top