भाजपा ने उत्तर प्रदेश के 11 जिलों में नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति कर संगठन में बड़ा बदलाव किया है।

लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में संगठन को नई धार देने के लिए 11 जिलों के जिलाध्यक्षों की नई सूची जारी कर दी है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा जारी इस सूची में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों का खास ख्याल रखा गया है।

इस फेरबदल में सबसे अधिक चर्चा सिद्धार्थनगर और अयोध्या की नियुक्तियों को लेकर हो रही है, जहां पार्टी ने अनुभवी और जमीनी कार्यकर्ताओं पर भरोसा जताया है।

​सिद्धार्थनगर: दीपक मौर्य बने नए जिलाध्यक्ष

​पार्टी ने सिद्धार्थनगर जिले की कमान दीपक मौर्य को सौंपी है। दीपक मौर्य संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और पिछड़ी जाति के बीच उनकी अच्छी पैठ मानी जाती है। पूर्वांचल की राजनीति में मौर्य समुदाय के महत्व को देखते हुए उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। उनकी नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य आगामी समय में संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक मजबूत करना है।

​अयोध्या में दोहरी नियुक्ति: जिला और महानगर को मिले नए अध्यक्ष

​राम मंदिर के उद्घाटन के बाद अयोध्या राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। यहाँ भाजपा ने राधेश्याम को अयोध्या जिले का नया जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है, जबकि कमलेश श्रीवास्तव को अयोध्या महानगर की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी ने यहाँ अनुभवी चेहरों को आगे लाकर यह संदेश दिया है कि अयोध्या में संगठन की सक्रियता और विकास कार्यों के बीच तालमेल उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

​जातीय संतुलन पर पार्टी का विशेष जोर

​पार्टी द्वारा जारी इस सूची में ब्राह्मण, ओबीसी और दलित समीकरणों को साधने की स्पष्ट झलक दिखती है। गोंडा में इकबाल बहादुर तिवारी को कमान देकर जहाँ ब्राह्मण वोट बैंक को सहेजने की कोशिश की गई है, वहीं लखीमपुर खीरी में अरविंद गुप्ता को जिम्मेदारी देकर वैश्य समाज को प्रतिनिधित्व दिया गया है। मिर्जापुर में लाल बहादुर सरोज की नियुक्ति के जरिए पार्टी ने अनुसूचित जाति के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करने का दांव चला है।

​इन जिलों के जिलाध्यक्षों के नामों पर भी लगी मुहर

​सूची के अनुसार, पीलीभीत में गोकुल प्रसाद मौर्य को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा लखीमपुर, शामली, अमरोहा, बागपत और सहारनपुर जिलों के लिए भी नए पदाधिकारियों की घोषणा की गई है। इस फेरबदल के माध्यम से भाजपा ने उन जिलों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है जहाँ पिछले चुनावों में संगठन के स्तर पर चुनौतियों का सामना करना पड़ा था।

​आगामी चुनाव 2027 की तैयारी

​राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा का यह कदम 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा है। पार्टी नेतृत्व ने उन चेहरों को आगे किया है जिनकी जनता के बीच स्वीकार्यता है और जो विपक्षी दलों के गठबंधन को चुनौती देने में सक्षम हैं। नए जिलाध्यक्षों को जल्द ही अपनी जिला कमेटियों का विस्तार करने और क्षेत्र में प्रवास शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।