यूपी पिछले 9 वर्षों में 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों वाला देश का पहला राज्य बनकर उभरा है। 2017 के केवल 4 एयरपोर्ट्स के मुकाबले आज 16 क्रियाशील एयरपोर्ट्स के साथ यूपी ने विमानन क्षेत्र में 400% की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की है।

उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व क्रांति आई है, जिसने राज्य की पहचान को पूरी तरह बदल दिया है। साल 2017 से पहले जहां उत्तर प्रदेश के हवाई नक्शे पर केवल गिनी-चुनी जगहें ही अंकित थीं, वहीं आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और केंद्र सरकार की 'उड़ान' योजना के समन्वय ने प्रदेश के छोटे-छोटे जिलों को भी हवाई मार्ग के जरिए देश और दुनिया के बड़े केंद्रों से जोड़ दिया है।

उत्तर प्रदेश अब पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों वाला देश का पहला और इकलौता राज्य बन गया है। यह सुदृढ़ बुनियादी ढांचा न केवल आम आदमी के सफर को आसान बना रहा है, बल्कि राज्य की 'वन ट्रिलियन इकोनॉमी' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सबसे बड़ा पावर इंजन साबित हो रहा है।

2017 बनाम 2026: एक तुलना 
अगर हम आंकड़ों की बात करें तो 2017 तक उत्तर प्रदेश में केवल 2 अंतरराष्ट्रीय लखनऊ और वाराणसी और 2 सक्रिय घरेलू हवाई अड्डे थे। पिछले 9 वर्षों में यह संख्या बढ़कर 16 क्रियाशील एयरपोर्ट तक पहुँच गई है। यह वृद्धि दर लगभग 400 प्रतिशत है, जो भारत के किसी भी राज्य में विमानन क्षेत्र के विस्तार की सबसे तेज गति है। सरकार का आगामी लक्ष्य कुल 21 हवाई अड्डों के संचालन का है, जिस पर काम युद्ध स्तर पर जारी है।

पांच अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट वाला देश का सिरमौर 
​उत्तर प्रदेश ने पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों का गौरव हासिल कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। लखनऊ और वाराणसी के पुराने केंद्रों के अलावा, कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने बौद्ध पर्यटन को वैश्विक पहचान दी है। अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने राम मंदिर के उद्घाटन के बाद तीर्थाटन को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। वहीं, नोएडा का जेवर एयरपोर्ट एशिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में शुमार होकर राज्य की वैश्विक पहुंच को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान कर रहा है।

'उड़ान' योजना से छोटे शहरों को मिली उड़ान

क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (UDAN) के तहत उत्तर प्रदेश के टियर-2 और टियर-3 शहरों का कायाकल्प हुआ है। आजमगढ़, अलीगढ़, मुरादाबाद, श्रावस्ती, चित्रकूट और बरेली जैसे शहरों में अब नियमित विमान सेवाएं उपलब्ध हैं। इन जिलों के लोग जो पहले हवाई यात्रा के लिए दिल्ली या लखनऊ पर निर्भर थे, अब अपने ही शहर से देश के प्रमुख महानगरों के लिए उड़ान भर रहे हैं।

आयात-निर्यात और कार्गो सुविधाओं का विस्तार 
एयरपोर्ट्स के इस जाल ने उत्तर प्रदेश को 'लैंड-लॉक्ड' राज्य की बाधाओं से मुक्त कर दिया है। जेवर और वाराणसी जैसे एयरपोर्ट्स पर अत्याधुनिक 'एयर कार्गो' सुविधाओं के विकास से राज्य के उत्पादों का निर्यात सुगम हुआ है। भारी मशीनरी से लेकर छोटे पुर्जों तक का आयात-निर्यात अब सीधे यूपी से हो रहा है, जिससे समय और लागत में भारी कमी आई है।

कृषि निर्यात और पारंपरिक उद्योगों को वैश्विक बाजार 
​हवाई कनेक्टिविटी का सबसे अधिक लाभ राज्य के कृषि क्षेत्र और पारंपरिक उद्योगों को मिला है। 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) के तहत भदोही के कालीन, मुरादाबाद के पीतल उत्पाद और फिरोजाबाद की चूड़ियां अब एयर कार्गो के जरिए वैश्विक बाजारों तक तेजी से पहुँच रही हैं।

वहीं, 'पेरिशेबल कार्गो सेंटर' के माध्यम से वाराणसी और लखनऊ एयरपोर्ट से ताजी सब्जियां, फल और काला नमक चावल जैसे उत्पाद किसानों की फसल खराब होने से पहले विदेशों में निर्यात किए जा रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है।

​निवेश, पर्यटन और रोजगार को मिला बढ़ावा

बेहतर एयर कनेक्टिविटी ने विदेशी निवेशकों के भरोसे को बढ़ाया है, जिससे राज्य में लाखों की संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। अयोध्या, वाराणसी और कुशीनगर में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स के आने से विदेशी पर्यटकों की आमद में 30% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इससे न केवल होटल इंडस्ट्री बल्कि परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प के व्यापार में भी जबरदस्त उछाल आया है।

भविष्य की राह और लक्ष्य 
राज्य सरकार अब सहारनपुर, ललितपुर, झांसी, सोनभद्र और मेरठ जैसे क्षेत्रों में हवाई सेवाओं के विस्तार पर काम कर रही है। इन 5 नए निर्माणाधीन एयरपोर्ट्स के पूरा होते ही प्रदेश के कुल सक्रिय एयरपोर्ट्स की संख्या 21 हो जाएगी। इस विस्तार के बाद उत्तर प्रदेश का हर बड़ा क्षेत्र हवाई मार्ग से पूरी तरह जुड़ जाएगा और राज्य दक्षिण एशिया का एक प्रमुख विमानन और व्यापारिक केंद्र बनकर उभरेगा।