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लखनऊ : उत्तर प्रदेश के चर्चित और निलंबित आईएएस (IAS) अधिकारी अभिषेक प्रकाश की बहाली का रास्ता अब पूरी तरह साफ होता नजर आ रहा है। लखनऊ हाईकोर्ट ने सोलर प्रोजेक्ट में एक करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के हाई-प्रोफाइल मामले में दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को रद्द कर दिया है।

कोर्ट ने माना कि इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) और बीएनएस (BNS) के तहत कोई अपराध नहीं बनता है।

​हाईकोर्ट ने रद्द की चार्जशीट और तलबी आदेश

​लखनऊ हाईकोर्ट ने इस मामले में कानूनी प्रक्रिया को खत्म करते हुए 15 मई 2025 को दाखिल की गई चार्जशीट और 17 मई के तलबी आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि आईएएस अभिषेक प्रकाश और निकांत जैन के खिलाफ लगाए गए कमीशन मांगने के आरोप साक्ष्यविहीन हैं। इस फैसले के बाद अब अभिषेक प्रकाश की सेवा में वापसी की उम्मीदें प्रबल हो गई हैं।

​सोलर प्रोजेक्ट और रिश्वत का विवाद

​यह पूरा मामला एक बड़े सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट से जुड़ा था। आरोप था कि इस प्रोजेक्ट को क्लीयरेंस दिलाने के नाम पर अभिषेक प्रकाश के कथित करीबी निकांत जैन ने 1 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ ने इसकी जांच की थी और 20 मार्च 2025 को इस संबंध में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसके बाद सरकार ने आईएएस अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया था।

शिकायतकर्ता का यू-टर्न: 'गलतफहमी' में की थी सीएम से शिकायत

​इस केस के गिरने की सबसे बड़ी वजह शिकायतकर्ता व्यवसायी का बदला हुआ बयान रहा। व्यवसायी ने कोर्ट में स्वीकार किया कि उसने मुख्यमंत्री से जो शिकायत की थी, वह महज एक 'गलतफहमी' का नतीजा थी।

व्यवसायी के इस हलफनामे के बाद कोर्ट ने माना कि जब मूल शिकायत ही आधारहीन है, तो कानूनी कार्यवाही जारी रखने का कोई मतलब नहीं रह जाता।

​एसटीएफ जांच और निलंबन की कार्रवाई

​मार्च 2025 में जब यह मामला सामने आया था, तब उत्तर प्रदेश की नौकरशाही हिल गई थी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसटीएफ ने त्वरित जांच शुरू की थी और साक्ष्यों के आधार पर अभिषेक प्रकाश पर विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया था। हालांकि, अब कोर्ट के फैसले ने जांच और चार्जशीट दोनों को खारिज कर दिया है।