प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की एक विशेष पॉक्सो कोर्ट ने शनिवार को आदेश जारी करते हुए ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके सहयोगियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर की पूर्व जांच रिपोर्ट और कोर्ट में पेश किए गए साक्ष्यों के बाद यह फैसला सुनाया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता और नाबालिगों के साथ हुए कथित व्यवहार को देखते हुए पुलिस को तत्काल केस दर्ज कर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच शुरू करनी चाहिए।
कौन हैं आशुतोष ब्रह्मचारी?
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज का जन्म शामली के कांधला कस्बे के एक पंडित परिवार में हुआ था। उनके पिता राजेंद्र पांडे दिल्ली रोड पर चलने वाली निजी बसों में कंडक्टरी का कार्य करते थे। आशुतोष महाराज कांधला के प्राचीन शाकुंभरी सिद्धपीठ मंदिर की कमेटी से जुड़े रहे हैं और वर्तमान में वह इसके प्रबंधक भी हैं।
धार्मिक रूप से उन्होंने साल 2022 में जगद्गुरु रामभद्राचार्य से दीक्षा ग्रहण की थी और तब से वे सन्यासी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। वे श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही मस्जिद ईदगाह मामले के मुख्यवादी और पक्षकार भी हैं।
गुरुकुल की आड़ में यौन उत्पीड़न के सनसनीखेज आरोप
यह पूरा मामला आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा 8 फरवरी को दायर एक वाद के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि अविमुक्तेश्वरानंद के गुरुकुल और शिविरों में नाबालिग बच्चों का बाल उत्पीड़न किया जा रहा है। शिकायत में दावा किया गया कि बच्चों से निजी सेवा, पालकी उठाने और भीड़ जुटाने जैसे काम कराए जाते हैं और उनके साथ कुकर्म किया गया।
आशुतोष महाराज ने कोर्ट में दो पीड़ित बच्चों को पेश किया, जिन्होंने बताया कि अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगियों ने उन्हें अपने साथ रखा और करीब एक साल तक उनके साथ गलत काम किया गया।
अदालत के समक्ष बच्चों की गवाही
सुनवाई के दौरान अदालत ने संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट रूम को खाली कराया और केवल वकीलों की मौजूदगी में बच्चों के बयान दर्ज किए। इन बयानों को कैमरे में भी रिकॉर्ड किया गया है। जज ने पुलिस को आदेश दिया कि एफआईआर दर्ज कर पारदर्शी जांच की जाए और पीड़ितों की पहचान व गरिमा की पूरी रक्षा की जाए। कोर्ट ने माना कि ये आरोप अत्यंत गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं, इसलिए पुलिस जांच अनिवार्य है।
शंकराचार्य का पलटवार और रामभद्राचार्य पर साजिश का आरोप
इस आदेश पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे पूरी तरह फर्जी करार दिया है। उन्होंने कहा कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य के साथ उनका वैचारिक 'वाकयुद्ध' चलता रहता है और उन्होंने ही अपने चेले को आगे कर यह झूठा मुकदमा करवाया है।
शंकराचार्य का दावा है कि वे गोमाता की रक्षा के लिए सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, इसलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आशुतोष ब्रह्मचारी एक हिस्ट्रीशीटर है और धन उगाही के लिए लोगों को धमकाता है।
फर्जी दस्तावेज और आशुतोष ब्रह्मचारी की खुली चुनौती
यौन शोषण के अलावा, आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य पर फर्जी लेटरपैड और दस्तावेज बनाने के भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि माघ मेला क्षेत्र में अविमुक्तेश्वरानंद खुद को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य बताकर अफसरों को गुमराह कर रहे हैं।
कोर्ट के आदेश के बाद आशुतोष ने अखिलेश यादव और डिप्टी सीएम को चुनौती दी कि वे उनके साथ चलें और 'शीश महल' के भीतर का सच देखें। उन्होंने अपनी जान को खतरा बताते हुए कहा कि उन्हें कार को बम से उड़ाने की धमकियां मिल रही हैं।
ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी जांच से पीछे हटने वाले नहीं हैं और उन्होंने प्रशासन से इस पूरे मामले में निष्पक्ष व त्वरित कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि सच को दबाया नहीं जा सकता और वे कानून का सामना करने के लिए तैयार हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा निशाना
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लेकर उन पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वे योगी आदित्यनाथ की तरह नहीं हैं, जो अपने ऊपर लगे मुकदमों को खुद ही वापस ले लें।