शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज यौन शोषण मामले में कल इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत पर सुनवाई होगी। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच यह तय करेगी कि स्वामी को राहत मिलेगी या पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है।

प्रयागराज: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ प्रयागराज के झूसी थाने में दर्ज गंभीर आपराधिक मामले में कल, 27 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई होने वाली है। गिरफ्तारी की तलवार लटकते देख शंकराचार्य ने अग्रिम जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच शुक्रवार दोपहर बाद इस याचिका पर सुनवाई करेगी। केस की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे देश की नजरें इस अदालती फैसले पर टिकी हैं।

​क्या हैं आरोप? दो नाबालिगों ने लगाया यौन शोषण का संगीन इल्जाम

​शंकराचार्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के अनुसार, घटना 13 जनवरी 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच की बताई जा रही है। आरोप है कि प्रयागराज के माघ मेला और कुंभ शिविरों के दौरान दो नाबालिग लड़कों का यौन शोषण किया गया। पीड़ित लड़कों में से एक की उम्र 14 साल और दूसरे की करीब साढ़े 17 साल बताई गई है। ये दोनों कथित रूप से स्वामी के गुरुकुल और शिविरों से जुड़े थे, जहा सेवा के नाम पर उन्हें रखा गया था।

​पॉक्सो एक्ट समेत इन धाराओं में दर्ज हुआ है मुकदमा

​मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट के आदेश पर प्रयागराज पुलिस ने यह मुकदमा दर्ज किया है। एफआईआर में पॉक्सो एक्ट की धारा 3, 4, 6, 16 और 17 के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3) को शामिल किया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कथित घटनाएं शिविर के भीतर और बाहर खड़ी गाड़ियों में भी हुईं। पुलिस ने इस मामले में दो-तीन अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया है।

​शंकराचार्य का पक्ष: 'यह सत्ता का षड्यंत्र और मुझे बदनाम करने की कोशिश'

​स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और 'सत्ता का षड्यंत्र' करार दिया है। उनका कहना है कि वे निर्दोष हैं और जांच में पूरा सहयोग करेंगे। स्वामी ने सवाल उठाया कि शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज पुलिस के साथ क्यों मौजूद हैं? उन्होंने यह भी दावा किया कि कथित पीड़ित बच्चे लंबे समय से शिकायतकर्ता के पास ही रह रहे हैं, जिसके सबूत वे अदालत में पेश करेंगे।

​कौन है शिकायतकर्ता? आशुतोष ब्रह्मचारी के दावों ने बढ़ाई मुश्किल

​इस केस में मुख्य शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी हैं, जिन्होंने अदालत में याचिका दायर कर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी। आशुतोष ब्रह्मचारी का दावा है कि पीड़ित बच्चों ने खुद उनके पास पहुँचकर शोषण की जानकारी दी थी। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि उनके पास बटुकों के शोषण के पुख्ता सबूत मौजूद हैं और मेडिकल जांच में भी कुकर्म की पुष्टि हो चुकी है।

​IPS अजयपाल शर्मा के हाथों में जांच की कमान, मठ पर पूछताछ की तैयारी

​प्रयागराज के झूसी थाने में दर्ज इस मामले की निगरानी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा की जा रही है। आईपीएस अधिकारी अजयपाल शर्मा का नाम इस जांच प्रक्रिया से जुड़ा है। पुलिस ने पीड़ितों के बयान दर्ज कर लिए हैं और आज पुलिस की एक टीम वाराणसी के केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ पहुँचकर शंकराचार्य और उनके शिष्यों से पूछताछ कर सकती है।

​21 लाख के इनाम का विवाद और बढ़ता तनाव

​यह मामला उस वक्त और अधिक संवेदनशील हो गया जब फलाहारी महाराज ने शिकायतकर्ता की नाक काटने पर 21 लाख रुपये इनाम देने का विवादित ऐलान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्य पर ऐसे घिनौने आरोप लगाकर करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुँचाई गई है। कानून विशेषज्ञों ने इस बयान को भड़काऊ और दंडनीय बताया है, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाने की बात कही है।