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लखनऊ : उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने जल जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्माण कंपनियों को अंतिम चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट आदेश दिया है कि बुंदेलखंड और विन्ध्य क्षेत्र के जिन गांवों में पाइपलाइन बिछाने के बाद भी घरों तक पानी नहीं पहुँचा है, वहां 30 दिन के भीतर जलापूर्ति शुरू की जाए।

यदि तय समय सीमा में काम पूरा नहीं हुआ, तो संबंधित कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और उनके टेंडर निरस्त कर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

​30 दिन की मोहलत और सख्त कार्रवाई की चेतावनी

​लखनऊ में जल निगम (ग्रामीण) के कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने कार्यदायी संस्थाओं की सुस्ती पर भारी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि "अब बहानेबाजी नहीं चलेगी।" विन्ध्य और बुंदेलखंड की परियोजनाओं में जहा भी तकनीकी खामियां या पाइपलाइन डैमेज होने के कारण पानी नहीं पहुँच रहा है, उसे एक महीने के अंदर ठीक किया जाए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो कंपनियां काम में लापरवाही कर रही हैं, उन पर केवल जुर्माना ही न लगाएं, बल्कि कानूनी कार्रवाई कर उनके प्रबंधन को जेल भेजने की तैयारी करें।

​BGCC और L&T जैसी बड़ी कंपनियों पर बरसे मंत्री

​समीक्षा के दौरान बुंदेलखंड और विन्ध्य क्षेत्र में BGCC और L&T जैसी कंपनियों के काम की धीमी प्रगति पर मंत्री ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने बताया कि राज्य में करीब 97 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन शेष 3 प्रतिशत गांवों में पाइपलाइन डैमेज या अन्य तकनीकी कारणों से सप्लाई रुकी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 'हर घर जल' पहुंचाना है और इसमें किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

​जनप्रतिनिधियों से संवाद और अधिकारियों की जवाबदेही

​स्वतंत्र देव सिंह ने जिला स्तर के अधिशासी अभियंताओं और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखें।

उन्होंने कहा कि अक्सर यह शिकायत आती है कि अधिकारी योजनाओं की सही जानकारी साझा नहीं करते। मंत्री ने चेतावनी दी कि अगर किसी अधिकारी ने जानकारी छिपाई या जनप्रतिनिधियों के सुझावों की अनदेखी की, तो उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

​'जल सारथी ऐप' का शुभारंभ और जन-संवाद

​बैठक के दौरान जलशक्ति मंत्री ने "जल सारथी ऐप" भी लॉन्च किया। इस ऐप के माध्यम से ग्रामीण अपनी पानी की समस्याओं को सीधे दर्ज करा सकेंगे और विभाग द्वारा उसका त्वरित निस्तारण किया जाएगा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे केवल दफ्तरों में न बैठें, बल्कि गांवों में जाकर धरातल पर पानी की स्थिति का जायजा लें और ग्रामीणों की शिकायतों को मौके पर ही दूर करें।