खरगोन। प्रदेश के खरगोन जिले के अंजन गांव के पास करीब तीन वर्ष पहले हुए भीषण टैंकर हादसे के बाद 15 लोगों की झुलसकर मौत हो गई थी, जबकि कई गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। अब इस मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मृतकों के परिजनों और घायलों को बड़ी राहत दी है।
मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) ने आदेश दिया है कि सभी 25 पीड़ितों को मिलाकर कुल 3.30 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए। ब्याज जोड़ने के बाद यह रकम लगभग 4 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच जाएगी, जिसका भुगतान बीमा कंपनी को करना होगा।
टैंकर के पलटने के बाद हुआ था विस्फोट
यह हादसा 26 अक्टूबर 2022 को हुआ था, जब पेट्रोल से भरा एक टैंकर तेज रफ्तार में मोड़ से गुजरते समय पलट गया। वाहन के पलटने के लगभग एक घंटे बाद उसमें विस्फोट हो गया। घटनास्थल के पास हैंडपंप पर मौजूद ग्रामीण अचानक आग की लपटों और धमाके की चपेट में आ गए। शुरुआत में एक बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए थे। बाद में अस्पताल में भर्ती कराए गए घायलों में से एक-एक कर 14 लोगों ने दम तोड़ दिया। इस तरह मृतकों की संख्या 15 तक पहुंच गई। इस मामले में मृतकों के परिवारों और घायलों ने मुआवजे के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
टैंकर मालिक, चालक और बीमा कंपनी पक्षकार
मामले में टैंकर मालिक, चालक और बीमा कंपनी को पक्षकार बनाया गया। सुनवाई के दौरान कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिनमें प्रत्यक्षदर्शी और संबंधित अधिकारी भी शामिल थे। बीमा कंपनी ने अदालत में जलते हुए टैंकर का वीडियो फुटेज भी प्रस्तुत किया। बीमा कंपनी की ओर से यह दलील दी गई कि ग्रामीण टैंकर पलटने के बाद पेट्रोल लूटने पहुंचे थे।
उनकी लापरवाही से हादसा गंभीर हो गया। कंपनी ने दावा किया कि चालक लोगों को दूर रहने की चेतावनी दे रहा था, लेकिन वे नहीं माने। हालांकि, अदालत ने तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर यह माना कि दुर्घटना का मुख्य कारण चालक की तेज गति और लापरवाही थी।
पीड़ितों की ओर से किए गए थे 25 क्लेम
पीड़ितों की ओर से 25 अलग-अलग क्लेम किए गए थे। अधिकतर मृतक मजदूर परिवारों से थे और वही अपने घरों के मुख्य कमाने वाले सदस्य थे। उनकी असमय मृत्यु से परिवार आर्थिक संकट में आ गए थे। अदालत ने इस सामाजिक और आर्थिक पक्ष को ध्यान में रखते हुए मुआवजे की राशि तय की।
यह फैसला केवल आर्थिक राहत भर नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि सड़क दुर्घटनाओं में जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। लंबे इंतजार के बाद आए इस निर्णय से प्रभावित परिवारों को कुछ हद तक सहारा मिलेगा। हालांकि, खोए हुए अपनों की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती, फिर भी न्यायालय के इस आदेश से उन्हें भविष्य के लिए संबल अवश्य मिलेगा।