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मोहन भारद्वाज: रोहतक। हरियाणा में इसी साल अक्टूबर माह में हुए विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता ने भाजपा को 47 सीटों के साथ लगातार तीसरी बार प्रदेश की सत्ता सौंपकर अपना जनादेश दे दिया। चुनाव परिणाम आने से पहले सरकार बनाने के सपने देख रही कांग्रेस का भाजपा से मिली हार हजम नहीं हो रही है। दो दिन चले विधानसभा सत्र में कांग्रेस ने एक बार फिर राज्यपाल के अभिभाषण पर अपने संबोधन में किसानों व पहलवानों पर फोकस कर इसकी झलक दिखा दी।

किसानों का सबसे अधिक बार जिक्र 

राज्यपाल के अभिभाषण पर अपने संबोधन में अधिकतर कांग्रेस विधायकों के फोकस में किसान रहे। कांग्रेस की तरफ से बोलने वालों ने प्रदेश सरकार के 24 फसलों पर एमएसपी देने की घोषणा पर तंज कसते हुए धान खरीद के दौरान मंडियों व डीएपी लेने में हो रही किसानों की दुर्दशा का जिक्र किया। सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच कई बार नौकझौंक की स्थिति भी देखने को मिली। दो दिन चले विधानसभा सत्र में कांग्रेस ने एक बार फिर आने वाले पांच साल के लिए जनता के बीच जाने के लिए अपना एजेंडा लगभग फिकस कर दिया।

किसानों व पहलवानों के इर्द-गिर्द घूमी सियासत 

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ 2020 में शुरू हुए किसान आंदोन के बाद से प्रदेश की सियासत किसानों व पहलवानों के इर्दगिर्द घूमती रही है। एक साल से अधिक समय तक किसान आंदोलन के चलते दिल्ली बंधक बनी रही और स्वयं प्रधानमंत्री ने आगे आकर तीन कृषि कानून वापस लेने की  घोषणा की। किसान आंदोलन की आंच अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि पहलवान विनेश फौगाट, बजरंग पूनिया व साक्षी मलिक ने तत्कालीन डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष बृजभूषण के खिलाफ जंतर मंतर पर धरना शुरू कर सरकार के खिलाफ एक और मोर्चा खोल दिया।

कांग्रेस ने पहले लोकसभा व फिर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में न केवल किसान व पहलवान आंदोलन को  भाजपा के खिलाफ हथियार के रूप में प्रयोग किया, बल्कि आंदोलन का केंद्र बिंदु रहे तीन प्रमुख चेहरों में से विनेश फौगाट को जुलाना से चुनाव मैदान में उतारा और बजरंग का कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर का पद देकर हवा का रुख अपने पक्ष में मोड़ने का प्रयास किया। बावजूद इसके कांग्रेस प्रदेश में भाजपा के हाथ लगातार तीसरी बार मिली हार से खुद के लिए सत्ता के दरवाजे खोलने में विफल रही।

हुड्डा ने सदन में सरकार को धमकाया

विधानसभा सत्र के दौरान अंतिम दिन कांग्रेस विधायक रघुबीर कादियान के संबोधन में जब शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने बीच में टोका टोकी की तो रघुबीर कादियान के समर्थन में अपनी सीट पर खड़े होकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि यदि सत्ता पक्ष सदन चलाने के मूड में नहीं है तो हम इनके किसी भी सदस्य को नहीं बोलने देंगे। विधानसभा अध्यक्ष संबोधन में दौरान बीच में बोलने पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों को टोकते रहे। जिसका कुछ खास असर देखने को नहीं मिला।