अपनी मांगों को लेकर अड़े कर्मचारियों और पुलिस के बीच हिंसक टकराव हो गया। इलाके में धारा 163 लागू होने के बावजूद भारी संख्या में श्रमिक प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए थे।

गुरुग्राम के औद्योगिक केंद्र मानेसर में गुरुवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों और पुलिस के बीच हिंसक टकराव हो गया। औद्योगिक क्षेत्र (IMT) में लागू निषेधाज्ञा के बावजूद भारी संख्या में कर्मचारी एकत्र हुए थे, जिन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठियां चलानी पड़ीं। इस कार्रवाई में एक प्रदर्शनकारी कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गया है, जिसका सिर फटने से काफी खून बह गया। 

निषेधाज्ञा के उल्लंघन पर पुलिस ने की कार्रवाई 
मानेसर क्षेत्र में सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने पहले ही धारा 163 लागू कर दी थी। इसके तहत पांच या पांच से अधिक व्यक्तियों के एक स्थान पर जमा होने पर पूर्ण प्रतिबंध था। हालांकि, होंडा कंपनी सहित लगभग आधा दर्जन अन्य औद्योगिक इकाइयों के श्रमिक अपनी समस्याओं और वेतन वृद्धि को लेकर फैक्ट्री के मुख्य द्वारों पर डटे हुए थे। जब पुलिस की टीमों ने उन्हें वहां से हटने और काम पर लौटने का निर्देश दिया, तो स्थिति बिगड़ गई। 

नोकझोंक के बाद लाठीचार्ज, मची भगदड़ 
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुरुआत में पुलिस और श्रमिकों के बीच तीखी बहस हुई। विवाद तब बढ़ गया जब कुछ कर्मचारियों ने पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की और कथित तौर पर पुलिसकर्मियों के मोबाइल छीनने का प्रयास किया। इसके जवाब में पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए लाठीचार्ज शुरू कर दिया। पुलिस की इस अचानक कार्रवाई से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। महिला कर्मचारियों सहित सभी श्रमिक जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। इसी भगदड़ के दौरान एक कर्मचारी के सिर पर लाठी लगने से वह लहूलुहान होकर गिर पड़ा, जिसे तत्काल समीप के अस्पताल ले जाया गया।
 
श्रमिक बोले- हक की लड़ाई में पुलिस का हस्तक्षेप गलत 
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का आरोप है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। हमारी लड़ाई प्रबंधन के साथ है। हम वेतन और सुविधाओं को लेकर विरोध कर रहे हैं। पुलिस को औद्योगिक विवाद में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और न ही प्रबंधन का पक्ष लेना चाहिए। 
श्रमिकों का यह भी कहना है कि पुलिस ने बिना किसी पूर्व चेतावनी के उन पर बल प्रयोग किया। प्रशांत कुमार नाम के कर्मचारी ने बताया कि वे केवल खड़े होकर चर्चा कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन पर लाठियां बरसा दीं, जिससे कई लोगों को अंदरूनी चोटें आई हैं।

प्रशासन का रुख और सुरक्षा व्यवस्था
पुलिस अधिकारियों का साफ कहना है कि इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पाबंदियां लागू की गई थीं। सार्वजनिक स्थान पर भीड़ जमा करना नियमों का उल्लंघन है। पुलिस के अनुसार उन्होंने कर्मचारियों को समझाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन जब भीड़ उग्र होने लगी और सरकारी कार्य में बाधा डाली गई, तो हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।

भारी पुलिस बल तैनात
फिलहाल मानेसर के औद्योगिक क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात है। कर्मचारी अब भी इस बात पर अड़े हैं कि जब तक प्रबंधन उनकी मांगें नहीं मानता वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। वहीं, पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी सूरत में शांति भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पुलिस की ओर से की गई इस कार्रवाई के बाद से औद्योगिक क्षेत्र में भारी सन्नाटा और तनाव पसरा हुआ है। 

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