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रविकांत सिंह राजपूत- कोरिया। कोरिया जिले में ह्यूमन फ्रेंडली हो चले कोबरा का रेस्क्यू करने के लिए वन विभाग की टीम मंगलवार को ग्राम चारपारा पहुंची। लेकिन ग्रामीणों की उस विषधर पर ऐसी आस्था उपज चुकी थी कि, उन्होंने वन विभाग की टीम को कोबरा का रेस्क्यू करने से रोक दिया। ग्रामीणों ने वनकर्मियों से कहा था कि, गांव के लोग एक समिति बनाकर उसकी देख रेख करेंगे। ग्रामीणों के भारी विरोध के चलते वन विभाग की टीम को बैरंग लौटना पड़ा। इस खबर के बाद कोरिया कलेक्टर विनय लंगेह ने सख्त रुख दिखाते हुए अंधविश्वास के जाल को तुड़वा दिया है।
कलेक्टर के निर्देश पर पुलिस और प्रशासन की बड़ी टीम के साथ वन विभाग ने कोबरा को रेस्क्यू कर तालाब से निकाल लिया। तालाब से निकालकर कोबरा को रामगढ़ के जंगलों में छोड़ दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि, कोरिया जिले के चार पारा गांव के एक तालाब में घूम रहा कोबरा प्रजाति का सांप पिछले पखवाड़ेभर से लोगों की उत्सुकता और कौतूहल का विषय बना हुआ है। वह लोगों के न सिर्फ करीब आ जाता है बल्कि उसे छूने, सहलाने से भी वह भागता नहीं बल्कि शांत भाव से लोगों के करीब बैठा रहता है।
ग्रामीणों ने बना ली थी समिति कोबरा की देख रेख के लिए समिति
हालांकि उसके साथ खिलवाड़ करने पर कोबरा ने एक ग्रामीण का काट लिया था, जिससे उसकी मौत भी हो चुकी है। इसी खबर के बाद डीएफओ प्रभाकर खलखो की पहल पर कोबरा का रेस्क्यू करने वन विभाग की एक टीम मंगलवार को ग्राम चारपारा पहुंची। ग्रामीणों ने विभाग की टीम को यह कहते हुए रेस्क्यू करने से रोक दिया कि, हमने समिति बनाकर तालाब से सबको बाहर कर दिया है और जिसको भी अब दर्शन करना है वो अब बाहर से ही दर्शन करेगा। जिसके बाद वन विभाग की टीम ने अपने पैर खिंच लिए और बिना रेस्क्यू किए लौट गए।
तालाब के भीतर घुसने की की कर रखी थी मनाही
जिस तालाब में उक्त कोबरा इधर-उधर घूम रहा है वह निजी तालाब है। तालाब के मालिक के भाई कृष्ण पैकरा का कहना है कि, इस कोबरा के साथ लोगों की आस्था जुड़ गई है। इनकी हम रक्षा करेंगे, तालाब के अंदर लोगों की आवाजाही बन्द कर दी गई है। जिसको दर्शन करना है, वो बाहर से ही दर्शन करेगा। हम लोगों ने वन विभाग को रेस्क्यू करने से रोक दिया है। कोबरा का रेस्क्यू करने चिरमिरी के रेंजर एसडी सिंह के नेतृत्व में टीम पहुंची थी जिसे बैरंग लौटना पड़ा। उनके आने से पहले ग्रामीणों ने तालाब से लोगो को दूर कर दिया था ताकि और किसी की जनहानि न हो सके। क्योंकि अब तक आने वाले लोग आस्था के नाम पर नाग को छू रहे थे, ऐसे में कभी भी पलटकर वह लोगों को काट सकता है। क्योंकि एक व्यक्ति की उसी के काटने से मौत हो चुकी है।
तालाब के पास ही ढोंढ़ी में था सांप का बिल
तालाब मालिक कृष्णा पैकरा के मुताबिक, तालाब के पीछे एक प्राकृतिक ढोढ़ी है। जिसमे पानी कम होने के कारण दो कोबरा तालाब में रहने आ गए हैं। उन्होंने कहा है कि, ढोढ़ी की सफाई करवाई जाएगी और उसे बेहतर बनाया जाएगा। वहीं अब चारपारा के ग्रामीणों का कहना है कि, नाग देवता किसी ग्रामीण को कुछ नहीं कर रहा है, जिसकी मौत हुई है उसने जबरन उसे गले मे डाला था।
हर कोई सोशल मीडिया में डाल रहा फोटो- वीडियो
इससे पहले नाग को दूध पिलाने और उसकी पूजा करने का सिलसिला पिछले पखवाड़ेभर से जारी है। यहां न सिर्फ कोरिया बल्कि सरगुजा से लेकर कोरबा जिले तक के लोग आकर नाग का दर्शन कर रहे हैं। कोई इसे आस्था तो कोई इसे अंधविश्वास कह रहा है। नाग का ये मामला सोशल मीडिया में काफी ट्रेंड कर रहा है। जो यहां आता वो नाग के साथ सेल्फी और उसका वीडियो बनाने से जुट जाता है। हर कोई नाग की फोटो वीडियो बनाने की कोशिश में रहता है। मंगलवार की सुबह से लगभग 2 हजार से ज्यादा लोग यहां पहुंच चुके हैं, खीर बनाकर प्रसाद बांटा जा रहा है, महिलाओं की संख्या ज्यादा है। कुछ महिलाएं भक्ति भाव में सराबोर मग्न होकर झूप रही हैं।
सांप दूध नहीं पीता, लेकिन ग्रामीणों के दावे कुछ और
सर्प विशेषज्ञों की माने तो सांप दूध नहीं पीता है। लेकिन यहां के ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपने हाथों से यहां कोबरा को दूध पिलाया है। उक्त कोबरा तैरते हुए लोगों के पास पहुंचता और फिर उसके मूड के हिसाब से लोगों द्वारा लाए गए दूध को पी जाया करता है। बस यही कारण लोग अपने साथ नारियल, अगरबत्ती और दूध लेकर यहाँ पहुंच रहे हैं।
