रूचि वर्मा- रायपुर। 1 अप्रैल से सीबीएसई विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो गई है। निजी स्कूलों ने फिर से पालकों को किताबों की लंबी-चौड़ी सूची थमा दी है। पालकों को निर्देशित भी कर दिया है कि उन्हें कौन सी दुकान से ये किताबें खरीदनी हैं।
किताबें बेहद महंगी
अध्ययन सामग्री खरीदने जा रहे पालक खाली जेब वापस लौट रहे हैं। यह हर साल का किस्सा है। कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने के कारण प्रत्येक शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में पालकों को अपने जरूरी खर्चों में कटौती करनी पड़ती है और निजी स्कूलों की मनमानी बर्दाश्त करनी पड़ती है। इस वर्ष भी यही हालात निर्मित हैं। किताबें बेहद महंगी हैं।
लौटा रहे केवल किताब मांगने पर
स्कूल किताब-कॉपियों के लिए किसी एक पुस्तक विक्रेता को अधिकृत कर रहे हैं, जो अधिकतम खुदरा मूल्य पर कॉपी और किताबों की बिक्री कर रहे हैं। पुस्तक विक्रेताओं के अधिकृत न होने पर अभिभावकों के पास अन्य दुकानों का विकल्प खुला होता है। इससे उन्हें एमआरपी पर 15 से 20 प्रतिशत तक छूट आसानी से मिल जाती है।
अभिभावक पूरी कीमत चुकाकर खरीद रहे हैं सेट
जिले के कई अंग्रेजी माध्यम स्कूलों ने कॉपी किताब की लिस्ट पालकों को सौंपने के बजाए पुस्तक विक्रेता की दुकान का पता बता दिया है। स्कूल का नाम और कक्षा बताने पर पहले से तैयार सेट अभिभावकों के हाथ में पकड़ा दिया जाता है। अभिभावक अगर सिर्फ किताब की मांग करें तो भी उन्हें बाद में आना कहकर लौटा दिया जाता है। मजबूरी में अभिभावक पूरी कीमत चुकाकर सेट खरीद रहे हैं।
मात्र 9वीं कक्षा की किताबों पर काम
निजी प्रकाशक हर साल किताब के कंटेंट में मामूली बदलाव कर उसे नया बताते हैं, जिससे पुरानी किताबें काम नहीं आतीं। कई विद्यालय ऐसे भी हैं, जो निर्धारित विषयों के अतिरिक्त एक्सट्रा करिकूलम के नाम पर दर्जनभर किताबें छात्रों को पढ़ा रहे हैं। यदि छात्र कहीं से पुरानी किताबें लेकर आ रहे हैं तो उन्हें यह कहकर नई किताबें लाने के लिए कहा जा रहा है कि पाठ्यक्रम में बदलाव हो गया है। किताब के किसी चैप्टर में 1-2 छोटे बदलाव के आधार पर भी यह फरमान सुनाया जा रहा है।
कक्षा 9 की किताबों पर चल रहा है काम
सीबीएसई संबद्ध स्कूलों के लिए पाठ्यक्रम का निर्धारण संबंधित बोर्ड करता है। इसके आधार पर एनसीईआरटी किताबें प्रकाशित करता है। 17 मार्च को एनसीईआरटी की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार सिर्फ कक्षा 9 की किताबों पर काम चल रहा है। इसके अतिरिक्त किसी भी बोर्ड की ओर से किसी भी विक्रेता को अधिकृत नहीं किया जाता है।
सूचित करें पालक
रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारतीय ने बताया कि, अभिभावक अपनी सुविधानुसार किसी भी दुकान से कॉपी-पुस्तकें क्रय करने स्वतंत्र हैं। यदि उन्हें बाधित किया जा रहा है तो वे सूचित करें। निजी स्कूल यह तय नहीं कर सकते हैं कि पालकों को किताबें किस दुकान से खरीदनी है।
30% किताबें इस्तेमाल ही नहीं
रायपुर किताब विक्रेता दीपक बल्लीवार ने बताया कि, निजी स्कूल जो किताबें खरीदने के लिए कहते हैं, उनमें एटलस, डिक्शनरी, राइटिंग बुक जैसी 30% किताबें ऐसी होती है, जो इस्तेमाल में नहीं आती है। स्कूल इन्हें छात्रों को घर में पढ़ने कहते हैं।
केवल मार्गदर्शन
निजी स्कूल संघ के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि, निजी स्कूल केवल पालकों को मार्गदर्शन देते हैं कि किताबें उन्हें कहां मिल सकती हैं। किसी स्थान विशेष से खरीदने बाध्य नहीं किया जाता है।
कागज-कंटेंट एक समान, एक 80 रुपए की और एक 350 रुपए की
राजधानी की अधिकतर बड़ी किताब दुकानें सदर बाजार में हैं। हरिभूमि ने यहां कई दुकान संचालकों से पालक बनकर बात की। एक ही जैसे कागज होने और उसके भीतर के कंटेट भी एक समान होने के बाद भी भिन्न-भिन्न कीमतें पालकों को चुकानी पड़ रही हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इनके प्रकाशन अलग हैं। जितने बड़े निजी प्रकाशक उतनी अधिक कीमतें। उदाहरणस्वरूप छात्रों की लिखावट सुधारने के लिए आने वाली राइटिंग बुक 80 रुपए में उपलब्ध है। यही राइटिंग बुक बड़े निजी प्रकाशकों के बैनर तले 350 से 400 रूपए में बिक रही है।
कीमतों में ऐसा अंतर
| कक्षा | एनसीईआरटी | निजी प्रकाशक सेट |
| पहली | 195 | 2000 से 3500 रुपए |
| दूसरी | 260 | 2000 से 3500 रुपए |
| तीसरी | 390 | 2500 से 4000 रुपए |
| चौथी | 360 | 2500 से 4000 रुपए |
| पांचवी | 600 | 2500 से 5000 रुपए |
| छठवीं | 490 | 3000 से 5000 रुपए |
| सातवीं | 585 | 3000 से 5500 रुपए |
| आठवीं | 590 | 3500 से 5500 रुपए |
| नवमी | 750 | 4000 से 6000 रूपए |
| दसवीं | 700 | 4000 से 7000 रूपए |
नोट : ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा की किताबें छात्रों द्वारा चुने गए विषय समूह जैसे-कला, वाणिज्य, विज्ञान अथवा गणित समूह के आधार पर भिन्न-भिन्न हैं। किंतु किसी भी संकाय की एनएसीईआरटी की किताबें 1500-2000 रुपए के रेंज में ही हैं, जबकि निजी हायर सेकंडरी कक्षाओं की निजी प्रकाशकों की किताबें 4000 रुपए से प्रारंभ होकर 7000 रुपए तक की रेंज में है।
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