राजेश दास/सुरेश सिंह- जगदलपुर। बस्तर जिले के दरभा ब्लॉक के अंतिम छोर तोयनार के जंगल में ग्रामीणों ने अद्भुत गुफा की खोज की है। नीले पत्थरों की यह गुफा प्राकृतिक सुंदरता व जैव विविधता का नायाब नमूना है। दो दिन पूर्व मिले गुफा के नीले पत्थर रोशनी में अलग ही छंटा बिखर रहे हैं, जिसे देखने ग्रामीणों की भीड़ जुटने लगी है। दो दशक पूर्व मवेशियों को चराने जाने वाले कुछ ग्रामीणों ने इस गुफा को देखा था, लेकिन नक्सलियों के भय से लोग इस ओर जाने से कतराते थे। अब जब नक्सलवाद समाप्ति पर है तो ग्रामीणों ने बैठक-कर गुफा की सफाई व खुदाई का काम शुरू किया है। पिछले दो दिन में सौ मीटर अंदर तक गुफा की सफाई की जा चुकी है। इन सौ मीटर में नीले पत्थरों की इस गुफा की अलग ही खूबसूरती देखने मिल रही है। दर्जनों युवा जब टार्च की रोशनी इस गुफा की दीवार पर डाले तो इसकी रोशनी दूर तक बिखरने लगी।
ग्रामीणों ने बताया कि, वर्ष 2005 में मवेशियों को चराने के दौरान कुछ ग्रामीणों ने इस गुफा के बारे में ग्राम प्रमुखों को बताया था, लेकिन तब नक्सलवाद चरम पर था तथा नक्सलियों की आवाजाही जंगलों से होती थी। ऐसे में ग्रामीणों ने जंगल का रुख करना बंद कर दिया था। यहां जाने वाले मार्ग को भी नक्सलियों ने दर्जनों जगह से काट दिया था। लेकिन अब ग्रामीणों की आवाजाही जंगल में शुरू हो चुकी है, यही वजह है कि अब ग्रामीण जंगल के बीच गुफा की खोज करने में कामयाब हुए। गुफा की खोज करने के बाद आसपास के गांव में ग्रामीण जंगल के बीच गुफा की खोज करने में कामयाब हुए। गुफा की खोज करने के बाद आसपास के गांव में जश्न का माहौल है और गुफा का दीदार करने लोगों की आवाजाही शुरू हो चुकी है।
कांगेर वेली में मिला था हरा गुफा
कांगेर घाटी नेशनल पार्क इलाका कोटमसर गुफा व तीरथगढ़ जलप्रपात के चलते पर्यटकों की पहली पसंद है। इससे पूर्व कोटुमसर परिसर के कंपार्टमेंट क्रमांक 85 में ग्रीन गुफा की खोज की गई थी। इस ग्रीन गुफा की दीवारों और छत से लटकती चूने की आकृतियों (स्टैलेक्टाइट्स) पर हरे रंग की स क्ष्मजीवी परतों के चलते इसे ग्रीन केव नाम दिया गया है। लाइम स्टोन से बनी यह गुफा कांगेर घाटी की सबसे दुर्लभगुफा माना जाता है। ग्रीन गुफा तक पहुंचने का रास्ता बड़े बड़े पत्थरों से होकर गुजरता है गुफा में घुसते ही आपको हरी दीवारों के दर्शन होंगे यह पर्यटकों को काफी आकर्षित करती है। जल्द ही चमकदार और विशाल स्टैलेक्टाइट्स तथा फ्लो-स्टोन पर्यटकों को देखने को मिलेगी।
25 फरवरी से पर्यटक कर सकेंगे दीदार
ग्राम प्रमुखों ने कहा कि 25 फरवरी को मेले का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए प्रचार प्रसार शुरू कर दिया गया है। स्थानीय लोग व पर्यटक गुफा की खूबसूरती का दीदार कर सकेंगे, इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। तोयनार से लगभग 2 किमी दूर जंगल में मिले गुफा तक जाने के लिए पगडंडी मार्ग भी तैयार किया जा रहा है, ताकि आने वालों को दिक्कत ना हो।
बारिश का पानी व मिट्टी से ढंक गया था गुफा का द्वार
तोयनार और मुंदेनार के ग्रामीण सामु बारे, पूर्व सरपंच व जनपद सदस्य हूंगा मांडवी, सरपंच बुदरू कवासी, सुकलू नंदा, मंडा हांदा, बुधराम भीमा, आयतु कोसा, कोयाराम मरकाम, बुधराम मरकाम, मंगलु बुदू, सोमारु मंगलू बामन लखमा, मनील बुदू, उमा बामन, सचिव कमल ठाकुर आदि ने बताया की यह गुफा 2005 में गांव के ग्रामीणों द्वारा खोजा गया था। उस दौरान नक्सलियों के भय के चलते आगे की खोज नहीं की गई थी। यही वजह थी कि बारिश के पानी व मिट्टी ने गुफा को ढंक दिया था। ढका हुआ होने से गुफा का पता किसी को नहीं चल पा रहा था। अब गांव के लोगों द्वारा गुफा की साफ सफाई कर के 100 मीटर तक सुरंग की खोज कर ली गई है।
