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अलविदा 2018 : भारत की इन पांच बेटियों ने खेल जगत में रचा इतिहास, नंबर-2 साल भर छाई रही

अब महिलाएं बढ़-चढ़कर खेलों में हिस्सा ले रही हैं, सभी खेलों में पदक और नाम कमाने के साथ देश को भी गौरव करने का अवसर दे रही हैं। हमें नहीं भूलना चाहिए कि पिछले ओलंपिक खेलों में मात्र दो पदक भारत की झोली में आए थे और दोनों ही पदक लाने वाली देश की बेटियां थीं।

अलविदा 2018 : भारत की इन पांच बेटियों ने खेल जगत में रचा इतिहास, नंबर-2 साल भर छाई रही

हर गुजरते साल के साथ एक राष्ट्र के रूप में हम बड़ी उपलब्धियां हासिल करते जा रहे हैं। इसमें महिलाओं की भागीदारी किसी भी मायने में कम नहीं है। साथ ही आधी आबादी अलग-अलग क्षेत्रों में सफलता के परचम भी लहराती है, कामयाबी की नई कहानी लिखती है। साल 2018 भी महिलाओं के लिए उपलब्धियों से भरा रहा, खेल जगत में पुरुषों से आगे निकलने वाली महिला खिलाडियों (Women player) द्वारा इस साल की उपलब्धियों पर एक नजर...

एक समय था जब खेलों में करियर का मतलब था क्रिकेट, वह भी पुरुषों के लिए। लेकिन अब ऐसा नहीं रहा। अब महिलाएं बढ़-चढ़कर खेलों में हिस्सा ले रही हैं, सभी खेलों में पदक और नाम कमाने के साथ देश को भी गौरव करने का अवसर दे रही हैं। हमें नहीं भूलना चाहिए कि पिछले ओलंपिक खेलों में मात्र दो पदक भारत की झोली में आए थे और दोनों ही पदक लाने वाली देश की बेटियां थीं।

खेलों के लिहाज से देखें तो इस साल जकार्ता में हुआ 18वें एशियन गेम्स (Jakarta Palembang 2018 Asian Games) एक बड़ा आयोजन था, जिसमें देश की महिला खिलाड़ी (Women player) उम्मीदों पर खरी उतरीं। एक रिक्शाचालक पिता और दिहाड़ी मजदूर मां की बेटी स्वप्ना बर्मन (Swapna Barman) ने हेप्टाथेलॉन खेल प्रतिस्पर्धा में गोल्ड मेडल ( gold medal) जीतकर इतिहास रच दिया। जलपाईगुड़ी की स्वप्ना ऐसा करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं।

इसके अलावा विनेश फोगाट (Vinesh phogat), राही सरनोबत (Rahi Sarnobat), हिमा दास (Hima Das) ने अपने-अपने खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता। इसके पहले हिमा जुलाई में फिनलैंड में हुए वर्ल्ड जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड जीत इतिहास रच चुकी थीं। दूसरी तरफ तीन बच्चों की मां मैरी कॉम ने मुक्केबाजी के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिख दिया।

ओलंपिक ब्रांज मेडलिस्ट मैरी कॉम (Mary Kom) हाल ही में विश्व चैंपियनशिप में छठा गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। 35 वर्षीय मणिपुरी खिलाड़ी की नजर अब 2020 में टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों पर हैं। इस बात में कोई शक नहीं कि भारत में महिलाओं के बीच मुक्केबाजी को प्रसिद्ध बनाने में मैरी कॉम (Mary Kom) का योगदान सबसे ज्यादा है।

इसके साथ ही मैरी कॉम (Mary Kom) की इस जीत ने साबित किया कि अगर इच्छा शक्ति, लगन और मेहनत करने का जज्बा हो तो मातृत्व महिलाओं के करियर में किसी तरह से बाधक नहीं है। शूटिंग में भी हरियाणा की मनु भाकर (Manu Bhaker) नए कीर्तिमान रच रही हैं। 16 साल की इस लड़की ने हाल ही में मैक्सिको में हुए 2018 आईएसएसएफ वर्ल्ड कप (ISSF WORLD CUP) में दो स्वर्ण पदक (gold medal) जीत पूरे देश का सम्मान बढ़ाया।

हिमाचल प्रदेश की आंचल ठाकुर (Aanchal Thakur) ने अपने हुनर का कमाल दिखा लोगों का दिल जीता। आंचल ने अंतरराष्ट्रीय स्कीइंग चैंपियनशिप में देश को पहला मेडल दिलाया, उन्होंने टर्की में हुए एलपाइन एजदर 3200 कप में कांस्य पदक जीता। क्रिकेट की बात करें तो पिछले कई सालों से भारतीय महिला क्रिकेट टीम का बढ़िया प्रदर्शन जारी है।

वहीं टी-ट्वेंटी टीम की कैप्टन हरमनप्रीत कौर (Harmanpreet Kaur) ने हाल ही में खेलों के सबसे छोटे संस्करण टी-ट्वेंटी में शतक जड़ रिकॉर्ड कायम किया। पंजाब की इस ऑलराउंडर खिलाड़ी ने न्यूजीलैंड की टीम के खिलाफ मात्र 51 गेंदों में शानदार 103 रन बनाए।

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