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विश्व कप 2019 : भारत वर्ल्ड कप 2019 में जीत का प्रबल दावेदार

इस साल चंद महीनों बाद शुरू होने वाले क्रिकेट विश्व कप 2019 (World Cup 2019) से पहले ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर रौंदकर भारत का इतिहास रचना 2019 में टीम इंडिया की मजबूत दावेदारी पेश करता है। भारत ने 70 साल में पहली बार मेजबान कंगारुओं को पीटकर टेस्ट सीरीज जीतने का कारनामा करने के बाद वनडे सीरीज भी अपने नाम किया है।

विश्व कप 2019 : भारत वर्ल्ड कप 2019 में जीत का प्रबल दावेदार
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इस साल चंद महीनों बाद शुरू होने वाले क्रिकेट विश्व कप 2019 (World Cup 2019) से पहले ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर रौंदकर भारत का इतिहास रचना 2019 में टीम इंडिया की मजबूत दावेदारी पेश करता है। भारत ने 70 साल में पहली बार मेजबान कंगारुओं को पीटकर टेस्ट सीरीज जीतने का कारनामा करने के बाद वनडे सीरीज भी अपने नाम किया है।

ऐसा पहली बार है जब टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट व वनडे दोनों (बायलेटरल) सीरीज जीतने का रिकार्ड बनाया है। इस वनडे सीरीज जीत के साथ ही भारत ने 2018-2019 ऑस्ट्रेलियाई दौरे का अंत बिना कोई सीरीज गंवाए किया है। टी-20 सीरीज बराबरी पर रही। टीम इंडिया ने वैसे तो इससे पहले ऑस्ट्रेलिया में दो वनडे सीरीज जीती हैं, लेकिन वह बायलेटरल नहीं बल्कि मल्टीनेशन वनडे सीरीज थी।

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भारत ने 1984-1985 में सुनील गावस्कार की कप्तानी में बेंसन एंड हेजेस वर्ल्ड चैंपियनशिप टूर्नामेंट व 2007-2008 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में कॉमनवेल्थ बैंक वनडे ट्राई सीरीज अपने नाम की थी। अब विराट ने बायलेटरल सीरीज में रिकार्ड बनाया है। मेलबर्न में 11 साल बाद भारत को जीत मिली है। इससे पहले 2008 में विजय हासिल हुई थी।

इस दौरे पर कप्तान विराट कोहली की अगुवाई वाली टीम ने एकजुट होकर हर मैच जीतने के इरादे से खेला, जिसमें जबर्दस्त टीम भावना देखने को मिली। तीनों ही फॉर्मेट में विराट सेना का प्रदर्शन काबिलेतारीफ है। कभी नहीं लगा कि ऑस्ट्रेलिया अपनी धरती पर अधिक मजबूत है। पिछले विश्व कप विजेता कांगारु को उन्हीं की मांद में आगले विश्व कप से चंद माह पहले हराना टीम इंडिया की शानदार तैयारी को प्रमाणित करता है।

पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली ने भारतीय टीम में विदेशी धरती पर जीतने का जज्बा भरा था, उसके बाद महेंद्र सिंह धोनी ने इस जज्बे को और विस्तार दिया। धोनी के नेतृत्व में टीम इंडिया ने दूसरी बार विश्व कप जीता। गांगुली और धोनी की परंपरा को विराट कोहली आगे बढ़ा रहे हैं। वे खुद भी बल्ले से नित नया कीर्तिमान रच रहे हैं और अपने नेतृत्व में टीम इंडिया का भी इतिहास स्वर्णाक्षरों में लिख रहे हैं।

भद्रजनों के खेल क्रिकेट में इंग्लैंड, वेस्ट इंडीज व ऑस्ट्रेलिया की बादशाहत रही है। कुछ वर्ष पहले तक भारत को घरेलू शेर माना जाता था, लेकिन हाल के वर्षों में विदेशी पिच पर जीतने का रिकार्ड दर रिकार्ड बनाया है। टीम इंडिया ने इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया सभी को हराया है।

भारत में टीम के रूप में खेलने व जीतने की आदत डालना और भविष्य को ध्यान में रखकर खिलाड़ियों को नर्चर करने का दौर सौरभ गांगुली के कप्तान व गैरी कर्सटन के कोच रहने के समय से शुरू हुआ। धोनी व विराट दोनों ने इस परिपाटी को मजबूत किया। विराट पिछले कप्तानों से हटकर नया प्रयोग करने में भी दो कदम आगे रहते हैं।

इस वक्त भारत के पास तीनों ही फॉर्मेट के लिए खिलाड़ियों का ऐसा मजबूत पुल तैयार है कि ऐसा पुल विश्व में किसी भी क्रिकेट देश के पास नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में इस बार जीत में विराट के अलावा महेंद्र सिंह धोनी, रोहित शर्मा, चेतेश्वर पुजारा, केदार जाधव, यजुवेंद्र चहल, केएल राहुल, कुलदीप यादव आदि खिलाड़ियों ने बल्ले व गेंद से अहम भूमिका निभाई।

चहल ने तो फिरकी गेंदबाजी में रवि शास्त्री व मुश्ताक का रिकॉर्ड तोड़ा। इस वक्त अनुभवी धोनी आत्मविश्वास से भरे हुए हैं। वे विश्व के चुनिंदा फिनिशर हैं। उनका अनुभव इंग्लैंड में हो रहे 2019 के विश्वकप में विराट के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। कोच रवि शास्त्री व धोनी के साथ कप्तान विराट की ट्यूनिंग भी शानदार है। कोहली ने कहा भी है कि विश्व कप के लिए टीम इंडिया संतुलित है।

ऑस्ट्रेलिया में जीत से भारतीय टीम के हौसले बुलंद हैं। इस बार इंग्लैंड व ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत विश्वकप में जीत के प्रबल दावेदार हैं। कप्तान कोहली विश्व कप जीतने का कारनामा कर सकते हैं।

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