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एनालिसिस / कोहली ने फिर दिखाया अपना विराट स्वरूप, सचिन तेंदुलकर को ऐसे छोड़ा पीछे

दस साल पहले दाम्बुला में जब बीस साल की उम्र में विराट कोहली ने पहला एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच भारत की ओर से खेला था, तब किसने सोचा था कि अगले दस साल के भीतर दिल्ली में जन्मा यह खिलाड़ी ऐसे कीर्तिमान स्थापित कर चुका होगा, जो अब तक किसी ने नहीं किया। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने भी नहीं।

एनालिसिस / कोहली ने फिर दिखाया अपना विराट स्वरूप, सचिन तेंदुलकर को ऐसे छोड़ा पीछे
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दस साल पहले दाम्बुला में जब बीस साल की उम्र में विराट कोहली ने पहला एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच भारत की ओर से खेला था, तब किसने सोचा था कि अगले दस साल के भीतर दिल्ली में जन्मा यह खिलाड़ी ऐसे कीर्तिमान स्थापित कर चुका होगा, जो अब तक किसी ने नहीं किया। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने भी नहीं। विराट कोहली ने अपने नाम एक और रिकॉर्ड दर्ज कर लिया है।

कोहली एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में सबसे कम पारियों में 10 हजार रन पूरे करने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने सचिन तेंडुलकर के 17 साल पुराने वर्ल्ड रेकॉर्ड को तोड़ दिया है। इस मैच से पहले विराट कोहली के नाम 212 मैचों की 204 पारियों में 9919 रन थे। वेस्ट इंडीज के खिलाफ विशाखापत्तनम मैच के दौरान बुधवार को उन्होंने पारी के 37वें ओवर में एश्ले नर्स की गेंद पर यह मुकाम हासिल किया।

कोहली ने सिर्फ 205 पारियों में 10 हजार रन पूरे कर लिए। सचिन तेंडुलकर ने 31 मार्च 2001 को 259 पारियों में 10 हजार रन पूरे किए थे। इस लिहाज से देखें तो विराट ने सचिन से 54 पारियां कम खेली हैं। सबसे कम पारियों में 10 हजार रन पूरे करने में दूसरे पायदान पर भारत के ही पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली हैं, जिन्होंने 263 पारियों में 10000 का आंकड़ा छुआ था।

18 अगस्त 2008 को श्री लंका के खिलाफ अपने वनडे करियर की शुरुआत करने वाले कोहली ने जनवरी 2017 में सीमित ओवरों की कप्तानी संभाली थी। वनडे इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड तेंडुलकर के नाम है जिन्होंने कुल 18426 रन है। इसके बाद श्री लंका के कुमार संगकारा (14234), ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग (13704), श्री लंका के सनथ जयसूर्या (13430) और महेला जयवर्धने (12650) व पाकिस्तान के पूर्व कप्तान इंजमाम-उल-हक (11739) रन हैं।

सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीयों की लिस्ट में सचिन के बाद गांगुली का नंबर है जिन्होंने 11363 और द्रविड़ ने 10889 रन बनाए हैं। वहीं धोनी ने 10123 रन बनाए हैं। सचिन ने एक दिवसीय मैचों में दस हजार रन बनाने के लिए जहां 259 पारियों की मदद ली, वहीं विराट कोहली ने यह करिश्मा मात्र 205 पारियों में कर दिखाया।

इतने कम समय में विराट ने एक दिवसीय मैचों में दस हजार रन ही पूरे नहीं किए हैं, 37 शतक भी लगाए हैं। उनके दो शतक तो वैस्टइंडीज के खिलाफ पहले दो एक दिवसीय मैचों में ही आ गए हैं। टैस्ट मैचों की बात करें तो इस करिश्माई खिलाड़ी ने 2011 में शुरुआत की थी और सात साल में 73 मैच और 124 पारियां खेलते हुए 6331 रन बना डाले हैं, जिनमें 24 शतक और 19 पचासे शामिल हैं।

एक दिवसीय में 37 शतक के साथ 48 अद्धर्शतक भी शामिल हैं। जिस गति से वह रन, शतक और अद्धर्शतक बना रहे हैं, उससे यही लगता है कि वह अगले कुछ ही साल के भीतर मास्टर ब्लास्टर तेंदुलकर को पीछे छोड़ते हुए भारत की तरफ से शतकों का एक और शतक लगा चुके होंगे। टैस्ट और एक दिवसीय मैचों के शतकों को जोड़ लें तो इनकी संख्या 61 बैठती है।

यानी सचिन की बराबरी करने के लिए उन्हें अब 39 और शतकीय पारियों की दरकार है। जिस रंग में वह रन बना रहे हैं, उसमें किसी को संदेह नहीं है कि वह यह कारनामा कर दिखाएंगे। उनका समर्पण और जोश इसकी ताकीद करते हैं कि वह एक अलग ही स्तर पर खेल रहे हैं। महेन्द्र सिंह धोनी की कप्तानी में ही वह खास खिलाड़ी बन चुके थे परंतु जब से तीनों प्रारूपों की कप्तानी उन्हें सौंपी गई है, तब से विराट ने पीछे मुड़कर नहीं देखा है।

चाहे भारत की भूमि पर कोई सीरीज हो या विदेशी धरती पर, उनका बल्ला खुलकर चला है। बहुत लोग थे, जो कह रहे थे कि पिछली इंग्लैंड सीरीज में वह नहीं चल पाए थे। देखना होगा कि इस बार चल पाएंगे या नहीं। विराट ने वहां शतकीय पारी खेलकर बता दिया कि उनकी विफलता की वह कहानी चार साल पुरानी थी। अब वह पूरी तरह बदले हुए खिलाड़ी हैं।

बेशक, सौरव गांगुली के बाद महेन्द्र सिंह धोनी ने बतौर कप्तान भारतीय क्रिकेट टीम के विजय अभियान को जारी रखने में अहम योगदान दिया परंतु विराट कोहली ने इसे और मजबूती दी है और यह सुनिश्चित किया है कि जीत का यह सिलसिला निरंतर जारी रहे। इंग्लैंड में जरूर टीम के प्रदर्शन ने थोड़ा निराश किया है परंतु वहां के हालात हमेशा से ही भारतीय उपमहाद्वीप की टीमों के लिए एक कठिन चुनौती रहे हैं।

बाकी जगहों पर इस टीम ने अपना लोहा मनवाया है और लगभग सभी स्थानों पर विराट कोहली का बल्ला जमकर बोला है। तेंदुलकर और धोनी के बाद वही ऐसे खिलाड़ी साबित हुए हैं जिनकी ब्रांड वेल्यू सर्वाधिक है। अंतरराष्ट्रीय मैचों की अभी उनकी यात्रा दस साल की ही है।

पांच नवंबर को वह तीस साल के होने जा रहे हैं। जिस तरह की उनकी फिटनेस है, उसे देखते हुए यह माना जा सकता है कि अभी कम से कम आठ-दस साल वह और खेल सकते हैं।

जिस गति से वह रन और शतक बना रहे हैं, वही गति जारी रही तो आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि वह रनों और शतकों का कितना ऊंचा पहाड़ खड़ा कर सकते हैं।

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