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83 साल में पहली बार विदर्भ बना चैपिंयन, रचा इतिहास

विदर्भ ने फाइनल में सात बार के चैंपियन दिल्ली को नौ विकेट से हराकर पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया।

83 साल में पहली बार विदर्भ बना चैपिंयन, रचा इतिहास

विदर्भ ने आज इंदौर के होलकर स्टेडियम खेले जा रहे फाइनल में सात बार के चैंपियन दिल्ली को नौ विकेट से हराकर पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया। विदर्भ के सामने केवल 29 रन का लक्ष्य था और उसने एक विकेट पर 32 रन बनाकर आसान जीत दर्ज की।

नौवीं बार रणजी फाइनल में खेल रहे मुंबई के पूर्व कप्तान वसीम जाफर ने चौका जड़कर अपने करियर में पहली बार खिताबी मुकाबले में विजयी रन बनाया। विदर्भ इस तरह से रणजी चैंपियन बनने वाली 17वीं टीम बन गयी है। 83 साल में पहली बार विदर्भ ने रणजी चैम्पियनशिप जीती।

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विदर्भ ने टॉस जीतकर दिल्ली को पहले बल्लेबाजी का न्यौता दिया और फिर उसकी टीम को 295 रन पर आउट कर दिया। रजनीश गुरबाणी ने छह विकेट लिये। इसके जवाब में विदर्भ ने अक्षय वालकर (133) के प्रथम श्रेणी मैचों में पहले शतक के दम पर 547 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।

दिल्ली दूसरी पारी में 280 रन पर आउट हो गयी। विदर्भ ने आज सुबह अपनी पहली पारी तीन विकेट पर 528 रन से आगे बढ़ायी लेकिन दिल्ली ने उसके बाकी बचे तीन विकेट जल्द ही निकाल दिये। युवा तेज गेंदबाज नवदीप सैनी ने 135 रन देकर पांच विकेट लिये।

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दिल्ली को विदर्भ की पहली पारी में बायें हाथ के स्पिनर मनन शर्मा की कमी खली जो घुटने की चोट के कारण मैदान पर नहीं उतरे। उन्होंने हालांकि दूसरी पारी में बल्लेबाजी की।दिल्ली की दूसरी पारी में ध्रुव शोरे (62) और नितीश राणा (64) ने अर्धशतक जमाये। शोरे ने पहली पारी में भी 145 रन बनाये थे।

दिल्ली ने पारी की हार तो बचा ली लेकिन वह बड़ा स्कोर खड़ा करने में नाकाम रही। लगातार दूसरी बार फाइनल की मेजबानी कर रहे होलकर स्टेडियम में विदर्भ के सामने छोटा लक्ष्य था और उसने कप्तान फैज फजल का विकेट गंवाकर इसे हासिल कर दिया।

जाफर 17 और संजय रामास्वामी नौ रन बनाकर नाबाद रहे। मुंबई के पूर्व कप्तान जाफर नौवीं बार रणजी फाइनल में खेल रहे थे और हर बार उनकी टीम चैंपियन रही।

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