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IND vs SA: अगर यही हाल रहा तो 2018 में टीम इंडिया की इन ‘विराट’ हारों के लिए हो जाइए तैयार

भारत को दूसरे टेस्ट क्रिकेट मैच के पांचवें दिन सेंचुरियन में 135 रन से हार का सामना करना पड़ा जिससे उसने तीन मैचों की श्रृंखला 0-2 से गंवा दी है।

IND vs SA: अगर यही हाल रहा तो 2018 में टीम इंडिया की इन ‘विराट’ हारों के लिए हो जाइए तैयार
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घर के शेर भारतीय बल्लेबाजों ने एक बार फिर दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाजी आक्रमण के सामने घुटने टेक दिए जिससे विराट कोहली की टीम के लगातार नौ टेस्ट सीरीज जीतने के अभियान पर भी विराम लग गया।

भारत को दूसरे टेस्ट क्रिकेट मैच के पांचवें दिन सेंचुरियन में 135 रन से हार का सामना करना पड़ा जिससे उसने तीन मैचों की श्रृंखला 0-2 से गंवा दी है। विराट कोहली की कप्तानी में भारत की ये पहली टेस्ट सीरीज हार है, साथ ही साथ ये पहला मौका है जब कोहली के नेतृत्व में भारत ने एक ही सीरीज में 2 टेस्ट हारे हों और वह भी लगातार।

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आईसीसी रैंकिंग में नंबर-1 भारत के सामने अब अगली चुनौती है 24 जनवरी से खेला जाने वाला तीसरा और आख़िरी टेस्ट मैच। अगर टीम इंडिया 3-0 से हारता है तो कोहली की कप्तानी में ये पहला व्हाइटवॉश होगा और दक्षिण अफ़्रीकी सरज़मीं पर 2001 के बाद दूसरा।

इतना ही नहीं तीसरा टेस्ट हारते ही भारत नंबर-1 रैंकिंग से भी हाथ धो बैठेगा और टेस्ट के बेस्ट दक्षिण अफ़्रीका बन जाएंगे। टीम इंडिया का अफ्रीका में विदेशी सरज़मीं पर जो हालत हुई उसे देखते हुए इस साल लगता है कि भारत को सिर्फ हार ही नसीब होने वाली है।

विदेशी दौरे पर कड़ा इम्तिहान

बता दें कि टीम इंडिया जुलाई में अपने सबसे कठिन दौरे के लिए इंग्लैंड रवाना होगी, जहां भारत को 5 टेस्ट मैच खेलने हैं। क्योंकि इंग्लिश हालातों में भारत की हालत और भी खौफनाक हो सकती है। पिछले दो ढाई सालों से टीम इंडिया के शानदार प्रदर्शन ने एक उम्मीद तो जगाई थी कि अब हम विदेशों में जाकर भी बेहतरीन कर सकते हैं।

लेकिन टीम इंडिया के इस शर्मनाक प्रदर्शन ने साबित कर दिया कि भारतीय बल्लेबाज सिर्फ घर के ही शेर हैं। फिर नवंबर में टीम इंडिया का एक और कड़ा इम्तिहान के लिए ऑस्ट्रेलिया रवाना होगा जहां उसे वहां 4 टेस्ट मैच खेलने हैं।

मतलब साफ़ है अपने घर में खेलते हुए कोहली एंड कंपनी ने भले ही सफलता के कई परचम लहराए थे और लगातार 9 सीरीज़ जीतने के वर्ल्ड रिकॉर्ड की भी बराबरी कर ली थी। लेकिन अब तो साल 2018 ही तय करेगा भारतीय टीम फिसड्डी ही साबित होगी या टीम सफलता के एक नए मुकाम पर पहुंचेगी।

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