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सुप्रीम कोर्ट ने BCCI को दी 24 घंटे की मोहलत

अदालत ने बीसीसीआइ के वकील कपिल सिब्बल से कहा कि वह बोर्ड से बात कर शुक्रवार तक अपना जवाब दें।

सुप्रीम कोर्ट ने BCCI को दी 24 घंटे की मोहलत
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नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने जस्टिस लोढा समिति की सिफारिशों को लागू न करने को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को गुरुवार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया कि वह सभी सिफारिशों को लागू करे वरना सर्वोच्च अदालत कल अपना आदेश पारित करेगी कि बोर्ड के पदाधिकारियों की जगह पर प्रशासकों का पैनल नियुक्त कर दिया जाए।
मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने बीसीसीआई को कहा कि वह अदालत को शपथपत्र दे कि वह बिना किसी शर्त लोढा समिति की सिफारिशों को लागू करेगी वरना अदालत को अपना आदेश पारित करना होगा। उन्होंने कहा, यदि बीसीसीआई कोई शपथ पत्र देने से इन्कार करती है तो अदालत कल अपना आदेश पारित कर देगी। अदालत ने बीसीसीआई के वकील कपिल सिब्बल से कहा कि वह बोर्ड से बात कर शुक्रवार तक अपना जवाब दें। समझा जाता है कि सिब्बल ने और समय की मांग की लेकिन सर्वाेच्च अदालत ने इससे इन्कार कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड से सीधे सीधे शब्दों में कहा कि क्या आप लोढा समिति की सिफारिशों को लागू करेंगे या नहीं। सर्वाेच्च अदालत ने बीसीसीआई को फटकार लगाते हुए कहा,समय बर्बाद करना बंद करें। एक शपथ पत्र दें कि आप सिफारिशों को लागू करेंगे वरना हमें आदेश पारित करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
उच्चतम न्यायालय ने साथ ही बीसीसीआई को निर्देश दिया कि वह अपनी उन राज्य इकाईयों को धन आवंटित न करें जो इन सिफारिशों को मानने से इन्कार कर रही हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा,उन राज्य संघों को कोई धन आवंटित न किया जाए जो सुधरने को तैयार नहीं है। उन्हें धन की मांग करने का कोई हक नहीं है। वैसे भी आपको धन आवंटन की चर्चा करने की इतनी जल्दी क्या है। इससे पहले बीसीसीआई के वकील सिब्बल ने लोढा समिति की उच्चत न्यायालय में दायर की गई रिपोर्ट पर सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसने कभी भी समिति की सिफारिशों को मानने से इन्कार नहीं किया है।
सिब्बल ने कहा,बीसीसीआई के सभी सदस्यों की बैठक हुई थी। इसमें कई सिफारिशों को वोटिंग के जरिए खारिज किया गया था। लोढा समिति को भेजे गए सभी 40 ई-मेल्स रिकॉर्ड की जानकारी सर्वाेच्च न्यायालय के समक्ष पेश की जाएगी। यह बात सच नहीं है कि हमने समिति की ई-मेल्स पर कोई जवाब नहीं दिया। गौरतलब है कि लोढा समिति ने पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में जो रिपोर्ट पेश की थी उसमें समिति ने आरोप लगाते हुए कहा था कि बीसीसीआई सर्वाेच्च न्यायालय के आदेशों को नहीं मान रही है और और न ही बोर्ड में कोई सुधार कर रहा है।
समिति ने साथ ही यह भी कहा था कि बोर्ड समिति के सिफारिशों को लागू नहीं कर रहा है। बीसीसीआई का पक्ष है कि लोढा समिति की सिफारिशें भारतीय क्रिकेट के लिए बेहतर नहीं हैं और यह बोर्ड को पूरी तरह से कमजोर कर देंगी। वहीं लोढा समिति का कहना है कि बीसीसीआई को पारदर्शी बनाने के लिए सिफारिशें दी गई थी जिन्हें अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है।

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